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कोसमी डैम पर मॉक ड्रिल कर रेस्क्यू तकनीकों का किया गया प्रदर्शन

-भूकंप पूर्व तैयारी प्रशिक्षण में बाढ़ आपदा से बचाव की दी जानकारी। बैतूल। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देश पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा के संयुक्त तत्वावधान में 25 मार्च से 29 मार्च तक पांच दिवसीय भूकंप पूर्व तैयारी एवं क्षमतावर्धन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के चौथे दिन […]

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-भूकंप पूर्व तैयारी प्रशिक्षण में बाढ़ आपदा से बचाव की दी जानकारी।

बैतूल। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देश पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा के संयुक्त तत्वावधान में 25 मार्च से 29 मार्च तक पांच दिवसीय भूकंप पूर्व तैयारी एवं क्षमतावर्धन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के चौथे दिन विभिन्न प्रकार की आपदाओं तथा उनसे बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।प्रशिक्षण में बताया गया कि आपदाएं मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं, प्राकृतिक और मानव निर्मित। प्राकृतिक आपदाओं में भूकंप, बाढ़, आग, भूस्खलन, चक्रवात, आकाशीय बिजली, हिमस्खलन और सूखा शामिल हैं, जबकि मानव निर्मित आपदाओं में रेल, बस और हवाई दुर्घटनाएं, औद्योगिक हादसे, युद्ध तथा बांध टूटने जैसी घटनाएं आती हैं।
चौथे दिन कोसमी डेम पर बाढ़ आपदा से बचाव को लेकर विशेष प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें बाढ़ की स्थिति में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसकी जानकारी दी गई। साथ ही पानी में डूब रहे व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के तरीकों का प्रदर्शन भी किया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि रेस्क्यू दो प्रकार से किया जाता है। पहला ड्राय रेस्क्यू, जिसमें तैरना नहीं जानने वाले व्यक्ति को पानी में उतरने से मना किया जाता है और ह्यूमन चेन बनाकर, रस्सी, टायर ट्यूब, लाइफ बॉय, बांस, लकड़ी या कपड़ों की सहायता से बचाव किया जाता है। दूसरा अंडर वाटर रेस्क्यू, जिसमें प्रशिक्षित तैराक ही पानी में उतरकर चिन टो, आम्र्स टो, हेड टो और चेस्ट टो जैसी तकनीकों से डूबे व्यक्ति को बाहर निकालते हैं। इसके अलावा पानी से बाहर निकालने के बाद प्राथमिक उपचार देने, पेट से पानी निकालने तथा फायरमैन लिफ्ट तकनीक से घायल को अस्पताल या एम्बुलेंस तक पहुंचाने का भी प्रदर्शन किया गया। स्ट्रेचर के उपयोग की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि आपदा के समय पानी की खाली बोतलों से लाइफ जैकेट, सूखी लकड़ी, थर्माकोल, केले के तने, बांस की सीढ़ी और पीपे से अस्थायी राफ्ट बनाकर भी बचाव कार्य किया जा सकता है। इस मॉक ड्रिल में स्वास्थ्य विभाग, आयुष विभाग, नगर निगम, पुलिस, होमगार्ड, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस वालेंटियर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य आपदा के समय त्वरित और प्रभावी बचाव कार्य के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना रहा।