
बैतूल। नगर पालिका परिषद की 30 मार्च को होने वाले विशेष सम्मेलन में शहरवासियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आ सकता है। एजेंडा के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में संपत्तिकर में करीब 10 प्रतिशत तक वृद्धि करने पर विचार किया जाएगा। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो शहर के नागरिकों को अधिक टैक्स चुकाना पड़ सकता है। नगर पालिका की आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि पहले से आर्थिक दबाव झेल रही जनता पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालना कितना उचित होगा। खासकर तब, जब नगर पालिका की वित्तीय स्थिति पहले से ही कमजोर बताई जा रही है।
समेकित करोंं में भी वृद्धि की तैयारी
परिषद बैठक में संपत्ति कर के साथ समेकित करों में भी वृद्धि का मुद्दा शामिल है। इससे आवासीय और व्यावसायिक दोनों प्रकार की संपत्तियों के कर में बढ़ोतरी की संभावना है। यदि 10 प्रतिशत वृद्धि लागू होती है तो करदाताओं को पिछले वर्ष की तुलना में अधिक राशि जमा करनी होगी। इधर, नगर पालिका के सामने आय बढ़ाने के अन्य विकल्पों पर ठोस पहल नहीं होने से भी यह निर्णय चर्चा में है। वैसे आय बढ़ाने के लिए राजस्व वसूली में सुधार, बकाया कर की वसूली और अनावश्यक खर्चों में कटौती जैसे उपाय भी किए जा सकते हैं।
टैक्स बढ़ रहा पर सुविधाएं जीरो
शहरवासियों का कहना है कि यदि टैक्स बढ़ाया जाता है तो बदले में मूलभूत सुविधाओं में भी सुधार होना चाहिए। सडक़, नाली, स्वच्छता और पेयजल जैसी समस्याएं यदि जस की तस रहती हैं तो टैक्स वृद्धि का विरोध भी हो सकता है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय 30 मार्च को होने वाली परिषद की बैठक में लिया जाएगा। अब यह देखना होगा कि परिषद जनता पर कर का बोझ बढ़ाने का निर्णय लेती है या आय बढ़ाने के अन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार करती है।
लेगेसी वेस्ट कार्य की समयावधि व अतिरिक्त भुगतान की तैयारी
नगरपालिका के ट्रेंचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे के निष्पादन का काम कर रही ईको स्टैंड कंपनी की तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है। इसके बावजूद अब नगरपालिका परिषद की बैठक में कंपनी को फिर से समय देने और अतिरिक्त खर्च की मंजूरी का प्रस्ताव रखा गया है। इस मामले को लेकर सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं क्योंकि इसी कंपनी को अधिक भुगतान किए जाने के आरोप में पूर्व सीएमओ और एक इंजीनियर पहले ही निलंबित हो चुके हैं। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ट्रेंचिंग ग्राउंड में अब पहले से अधिक कचरा जमा हो गया है और उसके निष्पादन के नाम पर फिर अतिरिक्त राशि खर्च करने की तैयारी है। सवाल यह है कि जब कंपनी पहले तय समय में काम पूरा नहीं कर पाई तो आखिर किन आधारों पर उसे दोबारा मौका दिया जा रहा है।
परिषद के एजेंडे में यह विषय भी शामिल
Published on:
27 Mar 2026 09:03 pm
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