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25-30 साल सेवा देने वाले शिक्षकों की फिर परीक्षा! आदेश के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन

-केन्द्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके से मिले शिक्षक, परीक्षा आदेश निरस्त करने की उठाई मांग बैतूल। 25 से 30 वर्षों सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को एक बार फिर परीक्षा देने के आदेश से जिले के शिक्षकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी इस आदेश के तहत लंबे समय […]

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-केन्द्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके से मिले शिक्षक, परीक्षा आदेश निरस्त करने की उठाई मांग

बैतूल। 25 से 30 वर्षों सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को एक बार फिर परीक्षा देने के आदेश से जिले के शिक्षकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी इस आदेश के तहत लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पुन: परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। परीक्षा में असफल रहने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। इस आदेश को लेकर शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान देने वाले शिक्षकों को इस तरह परीक्षा के दायरे में लाना अन्यायपूर्ण है। संगठनों का आरोप है कि इस फैसले से शिक्षकों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है और वे परीक्षा में असफल होने के डर से मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। इसका असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ रहा है।
प्रतिनिधि मंडी केंद्रीय राज्य मंत्री से मिला
इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को आम अध्यापक शिक्षक संघ के नेतृत्व में शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केन्द्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को निरस्त करने की मांग की। शिक्षकों ने कहा कि यह निर्णय उनके सम्मान और आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाने वाला है, इसलिए सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।मुलाकात के दौरान केन्द्रीय मंत्री ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को सरकार के समक्ष गंभीरता से रखा जाएगा और उचित पहल करने का प्रयास किया जाएगा। इससे शिक्षकों को कुछ हद तक राहत की उम्मीद जगी है।
अध्यापक संघ ने इसे सरकार की नाकामी बताया
आम अध्यापक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष मदनलाल डढोरे ने कहा कि यदि सरकार इस मामले में उच्च न्यायालय में पुन: याचिका दायर करती है तो शिक्षकों को न्याय मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया तो कई शिक्षकों के सामने परिवार के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार को शिक्षकों की भावनाओं को समझना चाहिए। इस दौरान संगठन के राजेन्द्र कुमार बेले, हरिशंकर धुर्वे, अशोक राठौर, धीरेन्द्र ठाकरे, सुदर्शन झाड़े, चैतराम निरापुरे, अशोक कुमार इवने, हेमंत लहरपुरे, सीताराम मर्सकोले, प्रभाकर पवार, शिवपाल कुमरे और इन्द्रदेव धोटे सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।