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जनसुनवाई में छलका ग्रामीणों का दर्द, पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर उठे सवाल

बेलगांव में लाल पानी और सूखी पाइपलाइन, बोरपेंड में बार-बार जलता ट्रांसफार्मर, शिकायतों के बाद भी नहीं हो रहा स्थायी समाधान। बैतूल। कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई एक बार फिर ग्रामीणों की बेरुखी को उजागर करती नजर आई। मंगलवार को बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी […]

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बेलगांव में लाल पानी और सूखी पाइपलाइन, बोरपेंड में बार-बार जलता ट्रांसफार्मर, शिकायतों के बाद भी नहीं हो रहा स्थायी समाधान।

बैतूल। कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई एक बार फिर ग्रामीणों की बेरुखी को उजागर करती नजर आई। मंगलवार को बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखी, और निराकरण किए जाने की मांग की। प्रभात पट्टन विकासखंड के ग्राम बेलगांव से पहुंची महिलाओं ने बताया कि गांव में मौजूद दो हैंडपंप नाम मात्र के पेयजल स्रोत बनकर रह गए हैं। एक हैंडपंप से लाल रंग का पानी निकलता है, जो पीने योग्य नहीं है, जबकि दूसरे से इतनी कम मात्रा में पानी आता है कि ग्रामीणों को पर्याप्त पानी ही नहीं मिल पा रहा। मजबूरी में ग्रामीण असुरक्षित पानी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य पर भी खतरा बना हुआ है। ग्राम की कमलाबाई बारस्कर ने बताया कि पीएचई विभाग द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन आज तक घरों में पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। ठंड के मौसम में ही जब हालात इतने खराब हैं, तो गर्मी में स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीणों ने पेयजल समस्या के स्थायी निराकरण की मांग की।
इधर, ग्राम पंचायत बोरपेंड के ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने बताया कि जिस ट्रांसफार्मर से पूरे गांव को बिजली दी जा रही है, उसकी केवल बार-बार जल जाती है। लोड बढऩे की बात कहकर जिम्मेदारी से बचा जा रहा है, लेकिन न तो ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई गई और न ही कोई स्थायी समाधान किया गया। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को आए दिन अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है और केवल जलने से हादसे का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत कंपनी कार्यालय में कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। जनसुनवाई अब ग्रामीणों के लिए आखिरी सहारा बनती जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इन समस्याओं पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई करेगा या फिर अगली जनसुनवाई में यही शिकायतें दोहराई जाएंगी।

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