मालदीव और भारत के रिश्तों में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, जो पहले ‘इंडिया आउट’ कैंपेन के लिए जाने जाते थे, अब भारत को अपना “सबसे करीबी और भरोसेमंद साझेदार” बता रहे हैं। ये बयान… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान आया है। दोनों नेताओं के बीच राजधानी माले में मुलाकात हुई।
राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत की इस बात के लिए सराहना करते हुए कहा कि जब भी मालदीव पर कोई संकट आता है, तो भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आता है। उन्होंने कहा कि भारत और मालदीव का सहयोग सुरक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य कई क्षेत्रों तक फैला हुआ है, और ये सीधे मालदीव के आम लोगों की ज़िंदगी को छूता है।
प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में एक भव्य भोज का आयोजन भी किया गया, जहां राष्ट्रपति ने मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ की। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाइमेट एक्शन, हेल्थकेयर और स्किल डिवेलपमेंट जैसे कई मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की बात की। रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर भी बातचीत हुई, खासकर कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव के तहत चल रहे सहयोग को और मजबूत करने पर ज़ोर दिया गया।
आर्थिक साझेदारी पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और द्विपक्षीय निवेश संधि को दोनों देशों के लिए नए अवसरों का रास्ता बताया। डिजिटल इकोनॉमी की भूमिका को भी खास तौर पर रेखांकित किया गया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए UPI सिस्टम, RuPay कार्ड और स्थानीय मुद्रा में व्यापार जैसे समझौतों का स्वागत किया गया।
भारत और मालदीव के बीच जो विकास आधारित साझेदारी है, वो लोगों के बीच की नज़दीकियों को और गहरा कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव की उस मज़बूत प्रतिक्रिया के लिए भी आभार जताया, जिसमें हाल ही में भारत के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई और भारत के आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में साथ खड़ा होने का संदेश दिया।
बता दें कि इस मुलाकात में छह अहम समझौतों पर दस्तखत हुए। ये एमओयूज मछली पालन, मौसम विज्ञान, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, UPI, भारतीय फार्माकोपिया और एक नई कर्ज सहायता लाइन को लेकर थे। भारत ने मालदीव को करीब 4,850 करोड़ रुपये यानी लगभग 550 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रियायती कर्ज राशि देने की घोषणा भी की, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
ये दौरा न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा देता है, बल्कि ये दिखाता है कि आपसी सहयोग और विश्वास से कूटनीति में बड़े बदलाव मुमकिन हैं।