भरतपुर. विधानसभा चुनाव करीब आते ही अब गांवों की ओर से विधायक व मंत्री रुख करने लगे हैं। कहीं नोटों की माला का गणित बन रहा है तो कहीं समस्याओं से पनपा रोष जनप्रतिनिधियों को आइना दिखा रहा है। हालांकि अब गांव हो या शहर वर्तमान विधायक व मंत्रियों को समस्याएं बताने में महिलाएं भी पीछे नहीं है। रविवार को कामां विधायक व राज्यमंत्री जाहिदा खान गांव नंदेरा में अल्पसंख्यक बालिका आवासीय विद्यालय का शिलान्यास करने के लिए जैसे ही गांव नंदेरा में पहुंची तो गांव की नाराज महिलाओं ने मस्जिद के निकट भरे गंदे पानी में उनका रास्ता रोककर विरोध व्यक्त किया। साथ ही सरपंच मिसलू खान की ओर से विकास नहीं कराने का उलाहना दिया। इससे पूर्व राज्यमंत्री के पति एवं पूर्व प्रधान जलीस खान समझाइश करने के लिए पहुंचे तो उनकी भी महिलाओं ने एक नहीं सुनी। इसके बाद राज्यमंत्री के आने समय भी महिलाएं रास्ते पर ही जमी रहीं। इसके बाद राज्यमंत्री ने महिलाओं को आश्वासन दिया कि वे जल्द ही अफसरों से वार्ता करके समस्या का समाधान करवाएंगी। इसके बाद महिलाओं ने उनका रास्ता खोला।
सबसे ज्यादा मेवात की हालत खराब
अगर मेवात में विकास की बात करें तो यह कहना मुश्किल नहीं है कि वहां के निवासी मुसीबतों से जूझते जिंदगी का सफर तय कर रहे हैं। क्योंकि गांवों में गंदे पानी की समस्या और सड़कों पर जमा कीचढ़ विकास की कहानी बयां करता है। चाहे विधायक भाजपा का हो या कांग्रेस का, यहां लड़ाई खनन और कमीशन के आरोपों के बीच गूंजती रही है। शिकायतों से लेकर आरोपों के बीच चली जंग कभी खत्म नहीं हो पाती है। जनप्रतिनिधियों की बात करें तो वे इस कदर मजबूत हो चुके हैं कि उन पर शिकायत और आक्रोश का भी कोई फर्क नहीं पड़ता। चापलूसों के बीच आरोपों की कहानी का भी उन पर कोई प्रभाव नहीं। ऐसे में विरोध का सिलसिला चलता रहता है।