
यहां अजान क्षेत्र के ग्रामीणों के विरोध के बीच में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में दूसरे दिन बुधवार को भी पानी की आवक जारी रही।
ग्रामीणों के मंगलवार को डांकन मोरी के गेट बंद करने के बाद से वहां चलते देर शाम से यहां पुलिस बल तैनात है। ग्रामीणों ने सुबह जिला कलक्टर एलएन सोनी से मुलाकात की और पानी को बंध में बनाए रखने की मांग की, जिस पर उन्होंने किसी भी पक्ष को नुकसान नहीं होने का भरोसा दिया। मंगलवार शाम अजान बंध के आसपास के ग्रामीण घना में पानी के छोडऩे का विरोध करते यहां हंगामा किया और डांकन मोरी के गेट बंद कर दिया था।
सूचना पर सिंचाई विभाग, उद्यान अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक (ग्रामीण) राजेन्द्र शर्मा व सेवर थाना प्रभारी लखन सिंह खटाना व उद्योग नगर के धर्मराज चौधरी मय जाप्ते मौके पर पहुंचे और समझाइश की। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीण घना में पानी छोडऩे पर तैयार हुए थे। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार अजान बंध में बुधवार सुबह 8 बजे 6.90 फीट पानी रिकॉर्ड किया गया। अजान बंध की भराव क्षमता 11 फीट है। उच्चैन क्षेत्र में दो स्थानों पर कुछ लोगों की ओर से कटाव करने के चलते अब पानी का बहाव धीमा पड़ा है।
किसी का हक नहीं होगा प्रभावित
पांचना से अजान बंध में आए पानी को राष्ट्रीय केवलादेव उद्यान में लाने के लिए बीते चार दिनों से विशेष रूप से प्रयासरत डीग-कुम्हेर के विधायक विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि अजान बंध के पानी को लेकर संयम बरतना होगा। पांचना से पानी की आवक जारी है, तथा मानसून आने वाले दिनों में भी सक्रिय रहेगा।
ऐसे में गंभीर नदी के रास्ते अजान बंध में पानी की आवक जारी रहेगी। किसानों को उनके हिस्से का पूरा पानी मिलेगा। वर्तमान में जल संसाधन विभाग की लापरवाही से व्यर्थ बह रहे पानी को रोकने के यथोचित प्रबंध किए जाने चाहिए। इससे वर्षों से पानी को तरस रहे घना के सभी ब्लॉक जलराशि से सरसब्ज होंगे।
जल संसाधन विभाग का यह दावा
जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता सुरेश वीजावत ने बताया कि पिचूना-कुरका व सोनोठी के पास कुछ लोगों के बहाव क्षेत्र के हिस्से को काटने से पानी खेत सहित अन्य स्थान पर बह गया। उन्होंने बताया कि कटे बहाब क्षेत्र को कट्टे लगाकर बंद किया जा रहा है।
यूपी सीमा के नजदीक बोकोली हैड में वर्तमान में 6 इंच पानी चल रहा है और यहां से छह किलोमीटर आगे ही कुछ पानी निकला है। जबकि यूपी सीमा यहां से 15 किलोमीटर दूर है। कटाव नहीं होता तो इस पानी से अजान बंध अभी तक भर चुका होता। उन्होंने उम्मीद जताई कि कटाव बंद होने पर दो-तीन दिन में अजान बंध पूरा भर जाएगा।
नेचर गाइड व रिक्शा चालक भी मिले
केवलादेव नेचुरलिस्ट सोसायटी के अध्यक्ष अवधेश अवस्थी के नेतृत्व में नेचर गाइड और रिक्शा चालक ने बुधवार को जिला कलक्ट से मुलाकात की और उद्यान में पांचना का पानी छोडऩे की मांग की। इससे पहले सोसायटी के सदस्य व रिक्शा चालकों ने घना के सदर गेट पर बैठक की और शीघ्र पानी नहीं छोडऩे पर आंदोलन करने की चेतावनी दी। बैठक में संजीव भट्ट, कृष्ण कुमार, अंसार खान, हरीश शर्मा, नेम सिंह, कप्तान सिंह, मान सिंह, प्रकाश आदि मौजूद थे।
मास्टर प्लान को अमल में लाएं
सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता रहे शिवचरन धनकर ने बताया कि जल वितरण को लेकर अप्रेल 1979 'मास्टर प्लान फोर फ्लड कंट्रोल वर्क इन भरतपुरÓ सब कुछ पहले से ही तय है। गंभीर, रूपारैल व बाणगंगा नदियों में पानी उपलब्धता के अनुसार बांध व और नहरों में कितना रखा जाए पूरी तरह है। इसमें अजान बंध अपर में भराव क्षमता 6 फीट है। इसमें जुलाई अंत तक 2, अगस्त तक 4 और 15 सितम्बर तक 6 फीट पानी रखा जाएगा। इसकी लोअर की भराव क्षमता 11 फीट है। ग्रामीण इस हिस्से के पानी पर ही विरोध कर रहे हैं। मास्टर प्लान में जुलाई तक 5 फीट, अगस्त अंत तक 5.50 और 15 सितम्बर तक 11 फीट रखने की बात कही है।
तय समय में निर्धारित से अधिक पानी आने पर घना में छोड़ा जाना मास्टर प्लान का हिस्सा है, तो विरोध का सवाल ही नहीं चाहिए। जरुरत प्रशासनिक व जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को ग्रामीणों को समझाने की है।
Published on:
21 Jul 2016 05:23 pm
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