
अब अनुभव प्रमाण पत्र के साथ देना होगा उसका कार्य आदेश
भरतपुर. नगर निगम की प्रत्येक शाखा में अब किसी भी ठेका की प्रक्रिया में ठेकेदार को हिस्सा लेने पर अनुभव प्रमाण पत्र के साथ कार्य आदेश भी संलग्न करना होगा। इसकी जांच संबंधित शाखा व कमेटी की ओर से की जाएगी। साथ ही संबंधित फर्म, संस्था से भी अनुभव प्रमाण पत्र का सत्यापन कराया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने 17 जून के अंक में जिस ठेकेदार पर बंदर पकडऩे का जिम्मा, उसका अनुभव प्रमाण पत्र ही निकला फर्जी शीर्षक से समाचार ्प्रकाशित कर मामले का खुलासा किया था। इसके बाद बुधवार को आयुक्त नीलिमा तक्षक ने एक आदेश निकाला है।
जानकारी के अनुसार बंदर पकडऩे का कार्य कराने के लिए नौ जनवरी 2020 को निविदा जारी की गई। इसमें 20 लाख रुपए की लागत से शहर के अंदर बंदरों को पकडऩे का कार्य कराना तय किया गया था। इस टेंडर की प्रमुख शर्त में बंदर पकडऩे का दो वर्ष अनुभव अनिवार्य था। ऑनलाइन आमंत्रित निविदा में फर्म एनएस सर्विस की ओर से अपनी बोली प्रेषित की गई। इसके साथ एक वर्ष का अनुभव हिमांशु चौधरी के नाम से मेरठ नगर निगम का बताया गया। जो कि मेरठ नगर निगम के नाम से जारी अनुभव प्रमाण पत्र में 2016-17 में कार्य करना बताया गया। यह प्रमाण पत्र 12 जनवरी 2018 को जारी करना बताया गया। इसके साथ कार्य आदेश संलग्र नहीं था। मेयर अभिजीत कुमार के स्तर पर हुई जांच में अनुभव प्रमाण पत्र मेरठ नगर निगम से जारी होना ही नहीं पाया गया।
इन नियमों की भी नहीं हुई पालना
नगर निगम के सूत्रों की मानें तो निविदा प्रक्रिया में निविदा की शर्त में दो लिफाफों में दर प्रस्तुत की जानी थी, एक लिफाफे में तकनीकी बिड व एक में वित्तीय बिड संवेदक की ओर से प्रेषित तकनीकी व वित्तीय बिड को टेंडर मूल्यांकन समिति की ओर से नहीं खोला गया। संबंधित लिपिक की ओर से ऑनलाइन निविदा खोलकर सचिव स्तर से नेगोशिएशन कार्रवाई कराकर दर प्राप्त की गई। चूंकि एकल निविदा प्राप्त हुई थी। नेगोशिएशन दर प्राप्त करने के बाद एकल निविदा को स्वीकृति के लिए बोर्ड बैठक 10 फरवरी 2020 को प्रस्ताव संख्या 37 पर स्वीकृति के लिए लाया गया। इसमें नगर निगम आयुक्त की ओर से सदन को अवगत कराया गया कि बंदर पकडऩे के कार्य में प्राप्त एकल निविदा पर विचार एवं आवारा पशु पकडऩे के लिए कार्य आदेश पर विचार करने के लिए प्रस्तुत है। इस प्रस्ताव में नेगोशिएशन में प्राप्त दरों को नहीं बताया गया। इसके बाद निर्णय में लिखा गया कि बंदर पकडऩे के कार्य में दरों में नेगोशिएशन लेकर एसओपी कमेटी की ओर से दरों का विश्लेषण कर कार्य आदेश दिए जाने की एवं एकल स्वीकृति प्रदान की जाती है।
आयुक्त: ठेकेदार को देंगे नोटिस, नहीं होगा उसका भुगतान
जब इस प्रकरण को लेकर नगर निगम आयुक्त नीलिमा तक्षक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ठेकेदार को एक नोटिस भेजकर पूछा जाएगा कि उसके पास अगर कोई साक्ष्य है तो प्रस्तुत करें। ताकि अगर मामला न्यायालय में जाता है तो निगम के साक्ष्य होगा। विधिक राय भी ली जाएगी। लेखा शाखा को भी भुगतान रोकने के लिए पत्र लिखा जाएगा। जितने भी अनुभव प्रमाण पत्र कार्यों में लगाए जाते हैं, उनमें अब वर्क ऑर्डर की प्रति लगाना जरूरी होगा। जो भी फर्म निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेगी उससे 50 रुपए का एक स्टांप लिखवा कर लिया जाएगा कि उसकी ओर से लगाए गए सभी दस्तावेज सही है और गलत पाए जाने पर वह स्वयं दोषी होगा।
Published on:
18 Jun 2020 04:20 pm

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