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Gold-Silver Rate Effect : सोने-चांदी के रेट बढ़े तो आयुर्वेद की दवाएं क्यों हुई महंगी, जानें क्या है इनका कनेक्शन?

Gold-Silver Rate Effect : सोने-चांदी के रेट बढ़े तो आयुर्वेद की दवाएं क्यों महंगी हो रहीं हैं। जानें क्या है मामला?

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फाइल फोटो पत्रिका

Gold-Silver Rate Effect : सोने और चांदी के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब आयुर्वेदिक दवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर धातु और रत्न मिश्रित आयुर्वेदिक औषधियों की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है, जिससे गंभीर रोगों का इलाज कराना गरीब और मध्यम वर्ग के लिए मुश्किल होता जा रहा है। महंगी दवाओं से मरीज ही नहीं, बल्कि चिकित्सक भी इन्हें लिखने से बच रहे है।

पहले आयुर्वेदिक चिकित्सा में स्वर्ण भस्म, रजत भस्म और मोती की भस्मयुक्त दवाओं की बिक्री अधिक हुआ करती थी, लेकिन अब इनकी मांग लगातार घट रही है। इन दवाओं की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आम मरीज के लिए इन्हें खरीद पाना लगभग नामुमकिन हो गया है। ऐसे में मरीजों को बिना धातु और रत्न भस्म वाली दवाओं से ही इलाज कराना पड़ रहा है।

राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय के उपाधीक्षक डॉ. चंद्रप्रकाश दीक्षित ने बताया कि आयुर्वेद में असाध्य और गंभीर रोगों में काम आने वाली अधिकांश औषधियों में सोने और चांदी की भस्म का उपयोग किया जाता है। ये भस्म सुपर एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में काम करती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती हैं। सोने-चांदी के भाव बढ़ने से इन भस्मों के निर्माण की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर दवाओं की कीमतों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि कई ऐसी दवाएं हैं जिनकी कीमतों में हाल के समय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और मरीज महंगी दवा खरीदने से परहेज कर रहे हैं।

मरीजों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

हंगी होती आयुर्वेदिक दवाओं के कारण मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। पहले ही इलाज कराना आमजन के लिए कठिन था और अब सोने-चांदी युक्त दवाओं की कीमत बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि धातु और रत्न मिश्रित औषधियों की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को प्रभावी आयुर्वेदिक इलाज से वंचित होना पड़ेगा।

ऐसे बढ़ी दवाओं की कीमतें

आयुर्वेदिक दवा विक्रेता अनूप सिंघल ने बताया कि सोने और चांदी के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी का असर करीब 50 से अधिक आयुर्वेदिक दवाओं पर पड़ा है, जिनमें इन धातुओं की भस्म का उपयोग होता है। इससे इन दवाओं की खरीद और बिक्री दोनों प्रभावित हुई है।

उन्होंने बताया कि यकृती रस पहले 10 गोली 1750 रुपए में मिलती थी, जो अब 2214 रुपए में मिल रही है। सिद्ध मकरध्वज पहले 10 गोली 1850 रुपए में आती थी, जो अब 2758 रुपए में मिल रही है। वसंत कुमुदाकर रस पहले 850 रुपए में उपलब्ध थी, जो अब 1046 रुपए में मिल रही है। सूतशेखर रस पहले 900 रुपए में मिलती थी, जो अब 1175 रुपए में मिल रही है। वहीं स्वर्ण भस्म पहले 3220 रुपए में उपलब्ध थी, जो अब 3500 रुपए में मिल रही है।

ये दवा हुईं महंगी

चन्द्रप्रकाश दीक्षित ने बताया कि वात रोगों में उपयोगी बृ वातचिंतामणि रस, श्वास कास में उपयोगी श्वास कास चिंतामणि रस, बच्चों के रोगों में उपयोगी कुमार कल्याण रस, बसंत कुसुमाकर रस, बसंतमालती रस आदि दवाओं पर अधिक असर पड़ा है।