
भिलाई . ट्विनसिटी सहित पूरे प्रदेश में आयकरदाताओं को धारा-148 के तहत नोटिस भेजकर पुराने मामलों को दोबारा से खोला गया है। अकेले भिलाई में करीब 1500 से अधिक री-ओपनिंग के केस में आयकर विभाग ने इतनी जल्दबाजी दिखाई है कि करदाता को पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया। बिना होमवर्क किए विभाग ने पहले नोटिस जारी कर दिए। बाद में उस केस की जानकारी मांगी।
यह चौकाने वाला खुलासा यहां सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता कपिल गोयल ने किया। वे भिलाई सीए शाखा (आईसीएआई) के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने आयकर विभाग के सर्वे में करदाताओं पर धारा-११५ बीबीई के प्रयोग पर विभाग की खिंचाई भी की। कहा कि ऐसे कई मामले हंै, जिनमें विभाग ने पूरा विवरण लिए बिना ही करदाता पर कार्रवाई कर दी। इससे करदाता को मानसिक क्षति पहुंची है। गोयल ने यहां तक कहा कि विभाग उच्च न्यायलय के द्वारा दिए गए अहम फैसलों को भी दरकिनार करते हुए धारा-११५ बीबीई व १४८ का प्रयोग कर रहा है जो कि पूरी तरह से गलत है।
धारा-115 यानि शनि की साढ़े साती शुरू
गोयल ने आयकर की धारा-११५ बीबीई को शनि की साढ़े साती के बराबर बताया। कहा कि आयकर विभाग कहीं भी छापा या सर्वे करता है तो धारा-११५ लगा देता है। एक करदाता की जितनी आय नहीं है, उससे अधिक कर देना होता है। जबकि इस धारा का उपयोग तब होना चाहिए जब करदाता के पास कमाई हुई रकम का कोई स्त्रोत नहीं मिले, लेकिन ४०-४५ फीसदी आकयर के सर्वे या रेड में विभाग की ओर से करदाता पर यही धारा थौंप दी जाती है। सर्वे के दौरान इस धारा का गलत प्रयोग हो रहा है।