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CG News: सोनोग्राफी से बेटियों की ‘साइलेंट हत्या’, दुर्ग-भिलाई में लिंग परीक्षण का खेल, क्या है हकीकत?

Bhilai News: दुर्ग-भिलाई में चिकित्सा तकनीक का खतरनाक दुरुपयोग सामने आ रहा है, जहां भ्रूण की बीमारियों की जांच के लिए बनी सोनोग्राफी अब बेटियों के लिए ‘साइलेंट हत्या’ का जरिया बनती जा रही है।

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सोनोग्राफी से बेटियों की ‘साइलेंट हत्या’ (फोटो सोर्स- पत्रिका)

सोनोग्राफी से बेटियों की ‘साइलेंट हत्या’ (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: भ्रूण की जन्मजात या आनुवांशिक बीमारियों की जांच के लिए विकसित सोनोग्राफी तकनीक दुर्ग-भिलाई में अब बेटियों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। आरोप है कि इसका दुरुपयोग कर लिंग परीक्षण किया जा रहा है और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर अपराधों को बढ़ावा मिल रहा है। प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 (पीसीपीएनडीटी एक्ट) के तहत लिंग बताना दंडनीय अपराध है, इसके बावजूद मौखिक संकेतों के जरिए कानून की अनदेखी की जा रही है।

सोनोग्राफी के दुरुपयोग से बेटियों की ‘साइलेंट हत्या’

जिले में 101 सोनोग्राफी केंद्र संचालित हैं, जहां प्रतिदिन औसतन 1000 गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। एक महिला की गर्भावस्था में 2-3 बार सोनोग्राफी कराई जा रही है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या के बावजूद निगरानी व्यवस्था लगभग नगण्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि लिंग परीक्षण के बिना कन्या भ्रूण हत्या संभव नहीं, ऐसे में इस गोरखधंधे में चिकित्सा क्षेत्र के कुछ लोगों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।

जिले में गर्भपात (एमटीपी) के लिए 27 अधिकृत अस्पताल हैं। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 433 वैध गर्भपात दर्ज किए गए हैं, जबकि जानकारों का अनुमान है कि अवैध गर्भपात की संख्या इससे दोगुने से भी अधिक हो सकती है। मेडिकल स्टोर्स पर गर्भपात की दवाओं की आसान उपलब्धता और कुछ चिकित्सकों की कथित संलिप्तता इस स्थिति को और गंभीर बना रही है।

30 साल में एक भी मामला दर्ज नहीं

पीसीपीएनडीटी एक्ट लागू हुए तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन दुर्ग जिले में अब तक भ्रूण लिंग परीक्षण या भ्रूण हत्या का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई। हालांकि, गिरते लिंगानुपात को देखते हुए इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं।

लिंगानुपात बिगड़ने के गंभीर परिणाम

समाजशास्त्री डॉ. एस.के. श्रीवास्तव के अनुसार, लिंगानुपात में असंतुलन से समाज में कई गंभीर समस्याएं जन्म लेती हैं। लड़कियों की कमी के कारण विवाह योग्य युवकों की संख्या बढ़ती है, जिससे कुंठा, अवसाद, नशे की प्रवृत्ति, महिलाओं के खिलाफ अपराध, मानव तस्करी और जबरन विवाह जैसी घटनाएं बढ़ती हैं। हरियाणा कुछ क्षेत्रों में उदाहरण सामने आ चुके हैं।

स्टिंग ऑपरेशन ही एक रास्ता

लिंग परीक्षण का कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, क्योंकि यह गैर-जमानती अपराध है। अक्सर मौखिक रूप से जानकारी देकर आरोपी बच निकलते हैं। ऐसे में कपल बनकर सोनोग्राफी सेंटर पहुंचना और सौदेबाजी को रिकॉर्ड करना ही इस गोरखधंधे को उजागर करने का प्रभावी तरीका माना जा रहा है।

डॉ. श्रवण दोनेरिया, नोडल अधिकारी, पीसीपीएनडीटी एक्ट के मुताबिक, जब से मैं नोडल हूं, लिंग जांच की कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलते है तो कार्रवाई की जाएगी।

विजय कसार, लीगल एडवाइजर, पीसीपीएनडीटी एक्ट ने बताया बैठकों में शामिल होता हूं। अब तक भ्रूण लिंग परीक्षण या भ्रूण हत्या का कोई मामला हमारे सामने नहीं आया है।"

डॉ. अर्चना चौहान, नोडल अधिकारी, एमटीपी के मुताबिक, वयस्क लिंगानुपात के मुकाबले चाइल्ड लिंगानुपात कम है, लेकिन राष्ट्रीय और राज्य स्तर की तुलना में दुर्ग की स्थिति बेहतर है।

अभिजीत सिंह, कलेक्टर दुर्ग ने बताया सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जानकारी मंगाई गई है। बैठक में समीक्षा की जाएगी। उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।