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Medical college hospital: मेडिकल कॉलेज अस्पताल 4 साल से अधूरा, 109 करोड़ की स्वीकृति के बाद भी काम बंद, डीन बोले- हाई लेवल मेटर है

Medical college hospital: अस्पताल भवन अधूरा रहने से हर वर्ष नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की गाइडलाइन पूरी करने में भी आती है दिक्कत, एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

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Medical college hospital

Ambikapur Medical college hospital building work (Photo- Patrika)

अंबिकापुर. राजमाता देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कालेज अस्पताल के अधूरे निर्माण पूर्ण होने का इंतजार पिछले 4 साल से है। पहले कोविड के कारण काम में देरी हुई फिर बजट के लिए करीब 2 साल इंतजार करना पड़ा और अब बजट के बाद भी मेडिकल कालेज अस्पताल (Medical college hospital) की अधूरी बिल्डिंग का काम शुरु नहीं हो सका है। अस्पताल भवन अधूरे होने से एनएमसी के गाइडलाइन को पूरा करने में परेशानी होती है। इसे लेकर हर वर्ष मान्यता पर सवाल खड़े होते हैं। वहीं एमबीबीएस के विद्यार्थियों को पढ़ाई प्रभावित होती है। अधूरे पड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन निर्माण के लिए पिछले ही बजट में ही 109 करोड़ रुपए की स्वीकृति शासन द्वारा दी गई है। मगर अब भी निर्माण रुका हुआ है। निर्माण कार्य शुरु न होने का कारण मेडिकल कॉलेज के डीन के पास भी नहीं है। उनका कहना है कि यह हाईलेवल का मामला है।

सरगुजा में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। मेडिकल कॉलेज जुगाड़ के भवन में गंगापुर में संचालित किया जा रहा था, जबकि अस्पताल (Medical college hospital) आज भी जिला अस्पताल को संबद्ध कर काम चलाया जा रहा है। वर्ष 2022-23 में कॉलेज का निर्माण तो गंगापुर में हो गया जबकि अस्पताल का निर्माण आज भी अधूरा है।

पिछले १२ वर्ष से खुद का मेडिकल कॉलेज का अस्पताल नहीं मिल पाया है। आज भी अस्पताल का निर्माण अधूरे पड़े हैं। अधूरे निर्माण धीरे-धीरे खंडहर होने की स्थिति में है। आज भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Medical college hospital) का संचालन पूराने जिला अस्पताल में चल रहा है, जो एनएमसी के अनुरूप नहीं है।

इससे एमबीबीएस के विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। बता दें कि पुराने जिला अस्पताल एनएमसी के गाइडलाइन के अनुरूप नहीं है जो कि मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए उपयुक्त हो सके।

फंड मिलने के ढ़ाई साल बाद भी निर्माण अधूरा

पहले कोविड के कारण भवन निर्माण में देर हो चुकी थी। फिर फंड की कमी के कारण निर्माण 2 साल से लटका रहा। अब फंड मिलने के करीब ढाई साल बाद भी अधूरा पड़ा मेडिकल कालेज अस्पताल (Medical college hospital) भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। जबकि पहले ही मेडिकल कालेज में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण दो बार जीरो ईयर की मार झेलनी पड़ चुकी है।

अधूरे निर्माण पूर्ण करने मिले हैं 109 करोड़

मेडिकल ऑलेज अस्पताल भवन के लिए करीब 109 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी शासन द्वारा दे दी गई है। मगर अब भी निर्माण रुका हुआ है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम का कहना है कि निर्माण के लिए टेंडर भी हो चुका है। टेंडर हुए भी काफी समय हो चुका है। इसके बावजूद भी कार्य (Medical college hospital) शुरू नहीं होने का कारण पूछने पर डीन का कहना है कि इसकी जानकारी मुझे नहीं है। यह हाईलेवल का मामला है।

संभाग से ही पूर्व व वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री

सरगुजा संभाग से ही पूर्व व वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री के रहते अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। पूर्व में टीएस सिंहदेव स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Medical college hospital) का निर्माण पूर्व के सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हुआ था, लेकिन पूर्ण नहीं हो सका। वर्तमान सरकार से लोगों की उम्मीदें थी पर आज भी अधर में लटका है।

Medical college hospital: 366 करोड़ हो चुके हैं खर्च

बिल्डिंग के लिए 374 करोड़ मिले थे जिसमें से 366 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हंै। ऐसे में अब अधूरे भवन के निर्माण के लिए करीब 119 करोड़ की आवश्यकता थी, जबकि शासन की ओर से 109 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।

डीन बोले- पढ़ाई और इलाज प्रभावित

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज (Medical college hospital) के डीन अविनाश मेश्राम का कहना है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन का निर्माण अधूरा होने के कारण कई तरह के परेशानी हो रही है। विद्यार्थियों को कॉलेज से दूर पढ़ाई के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है। आने-जाने के लिए विशेष साधन नहीं है। वहीं एनएमसी के मापडंड के अनुरूप जिला अस्पताल नहीं है। इससे पढ़ाई के साथ-साथ इलाज भी प्रभावित हो रहा है। निर्माण क्यों रूका है? इसकी पूर्ण जानकारी मुझे नहीं है। यह हाईलेवल का मामला है। जबकि टेंडर भी हुए काफी समय हो चुका है।

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