
कोलकाता से आए 30 कारीगर लगातार कार्य कर रहे
भिलाई . लाल मैदान पावर हाउस में तैयार हो रहे मइया का माटी दरबार अपने आप में अनोखा होगा। 60 फीट ऊंचे इस दरबार को तैयार करने में करीब 20 हजार मिट्टी से निर्मित कुल्हड, खप्पर, खपरा, कलश एवं मटकी का उपयोग किया गया है। ताकि विलुप्त होती कुम्हार संस्कृति को पोषित किया जा सके एवं मानव प्रजाति के लिए जहरीले एवं हानिकारक प्लॉस्टिक के बढ़ते प्रचलन को रोका जा सके।
रोजगार से जोडऩे की कोशिश
समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि समाज के लिए इस संदेश को देने करीब डेढ़ माह से इस दरबार को तैयार करने का काम किया जा रहा है। यहां कोलकाता से आए 30 कारीगर लगातार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दरबार निर्माण में प्रयोग किए जाने वाला सामान मिट्टी से बना है। इसे समिति ने कुम्हारों से खरीदा ताकि उन्हें भी रोजगार मिल सकें। उन्होंने बताया कि कुम्हार भी अपने पारंपरिक व्यवसाय से दूर होते जा रहे हैं। प्लास्टिक के सामानों की बाजार में बढ़ते प्रचलन के कारण कुम्हार बेरोजगार हो चुका है। समिति का यह प्रयास था कि वे कुम्हारों में फिर से नई उम्मीद जगाए और लोगों को भी उनकी बनाई चीजों को लेने प्रेरित करें। माटी का दरबार तैयार करने समिति को दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव एवं बिलासपुर आदि क्षेत्र कुम्हारों तक पहुंच उपयोगी सामाग्री खरीदकर लाने पड़ी। परंतु समिति के प्रयास के कारण आसपास के 150 किलोमीटर दूर तक रहने वाले कुम्हार को रोजगार प्राप्त हुआ है। समित के लोगों ने कहा कि उनकी कोशिश है कि पंडाल में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली प्लास्टिक की चीजों का उपयोग ना हो।
समिति के शानदार 48 वर्ष
महामंत्री विजय सिंह ने बताया कि समिति इस वर्ष अनपे 48 वर्ष पूरे कर रही है। अब तक समिति ने धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के प्रतिकात्माक रूपों का पंडाल तैयार किया था। जिसमें अक्षरधाम, लालकिला, मैसूर पैलेस, राममंदिर, दक्षिणेश्वर काली मंदिर, विटोरिया पैलेस शामिल था। इस बार 48वें वर्ष मां के दरबार करीब 5 हज़ार वर्ग फीट क्षेत्र में मइया का माटी दरबार तैयार किया जा रहा है। समिति के उपाध्यक्ष गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि दरबार के अंदर भक्तों की सुविधा के लिए एसी भी लगाया गया है ताकि यहां परेशानी ना हो। साथ ही यहां आने वाले लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुक भी किया जाएगा।
Published on:
27 Sept 2019 12:03 pm

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