बीएसपी में एजीएम बी अनुराधा की बेटी बित्रा मिमंशा राव व बेटे ने इस पेड़ की जान बचाने के लिए अपने पॉकेट मनी का पैसा खर्च कर दिया अपने पर्यावरण प्रेमी दिवंगत पिता बित्रा वेंकट श्रीनिवास राव की स्मृति ने बच्चों यह प्रशंसनीय कार्य किया।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकारी महकमा कितना लापरवाह है, इसका ताजा उदाहरण जिला अस्पताल परिसर में देखा जा सकता है। यहां नए भवनों के निर्माण के लिए आधा दर्जन से ज्यादा पेड़ों को काट दिया गया। सालों पुराने इन पेड़ों को आसानी से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता था, लेकिन प्रशासन से परमिशन का हवाला देकर ठेका एजेंसी ने अपना खर्च बचाने के लिए हर-भरे पेड़ों की बलि चढ़ा दी। पेड़ों को आसानी से दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जा सकता था, लेकिन इसमें खर्च होता। खर्च बचाने के लिए पेड़ों काटना सरल था।
जिला अस्पताल परिसर में कंडम हो चुके पुराने भवनों को तोड़कर नए भवन तैयार किए जा रहे हैं। सीजीएमएससी ने अलग-अलग कार्यों के लिए करीब 26 करोड़ का टेंडर जारी किया है। सीएमएचओ दफ्तर के पीछे क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक बनाया जा रहा है। इसके पिछले हिस्से में पीपल और अशोक के करीब 25 से 30 साल पुराने पेड़ लगे हुए थे, जो हरेभरे थे। पीपल और अशोक के आधा दर्जन पेड़ों को काट दिया गया। और पेड़ों को काटने की तैयारी है।
पेड़ों को जीवित रखना बड़ा काम
टाउनशिप में मुर्गा चौक के समीप 100 साल पुराना पीपल का पेड़ आंधी के कारण गिर गया। बीएसपी में एजीएम बी अनुराधा की बेटी बित्रा मिमंशा राव व बेटे ने इस पेड़ की जान बचाने के लिए अपने पॉकेट मनी का पैसा खर्च कर दिया। अपने पर्यावरण प्रेमी दिवंगत पिता बित्रा वेंकट श्रीनिवास राव की स्मृति ने बच्चों यह प्रशंसनीय कार्य किया। इस काम में बी अनुराधा ने भी साथ दिया। बच्चों की भावनाओं के मुताबिक संबंधित एजेंसी से चर्चा की। बच्चों ने पॉकेट से पैसा निकाला और इस काम को अपने जेब से पैसा खर्च कर जिंदगी दी।
जेडी इंटरप्राइजेस के सीईओ नेहा बंसोड ने बताया बताया कि मंगलवार को करीब 3 घंटे मशक्क के बाद इस पेड़ को वापस खड़ा किया गया। 20 दिन पहले से इस पेड़ की टहनियों को काटकर अलग करने के साथ-साथ ट्रिटमेंट किया जा रहा था। नेहा ने बताया कि हवा तूफान से पुराने पेड़ गिर जाते हैं, उसको बचाया जा सकता है। पेड़ों को प्रति उनका यह लगाव ही है कि सार्वजनिक पेड़ को खुद अपने पैसे से वापस खड़ा किया।
मेरे पिता पर्यावरण प्रेमी थे। हमेशा पेड़-पौधों की देखभाल करते थे। मुर्गा चौक के पास 100 साल पुराने पेड़े को गिरा हुआ देखे तो पापा की याद में शिफ्ट करवाने की सोचे। इसके लिए हमने अपनी पॉकेटमनी दी। बित्रा मिमंशा राव