28 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Breaking : बहुत पुण्यात्मा निकली पुष्पा देवी, संथारा संकल्प के दूसरे दिन ही मिल गई देह से मुक्ति

कसारीडीह निवासी पुष्पा देवी का संथारा व्रत पूरा हो गया। उन्होंने णमोकार महामंत्र के बीच शुक्रवार की अल सुबह 5.15 बजे देह का त्याग कर दिया।

2 min read
Google source verification
Dharma-Karma

Breaking : बहुत पुण्यात्मा निकली पुष्पा देवी, संथारा संकल्प के दूसरे दिन ही मिल गई देह से मुक्ति

दुर्ग. कसारीडीह निवासी पुष्पा देवी पति इंदरचंद सुराना 80 वर्ष का संथारा व्रत पूरा हो गया। उन्होंने णमोकार महामंत्र जाप के बीच शुक्रवार की अल सुबह 5.15 बजे देह का त्याग कर दिया। देह त्याग के बाद विधि विधान से उनका बैकुंठी यात्रा निकाली गई। हरनाबांधा मुक्ति धाम में जैन धर्म के अनुसार उनके देह का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिजन के अलावा जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। वे अपने पीछे पति इंदरचंद सुराना, पुत्र अभिनेष, प्रमोद व दो पुत्रियां सहित भरापूरा परिवार छोड़ गई हैं।

बैकुंठी में निकली अंतिम यात्रा
जैन धर्म के अनुसार पुष्पादेवी की अंतिम यात्रा बैकुंठी में निकाली गई। बैकुंठी एक प्रकार की पालकी/टोली होती है जिसमें आसन और ध्यान की मुद्रा में बैठाकर साधु साध्वियों की अंतिम यात्रा निकाली जाती है। इसी तरह पुष्पादेवी की अंतिम यात्रा भी बैकुंठी में निकली।

गुरुवार को सुबह 7 बजे तिविहार संथारा शुरू
बता दें कि शारीरिक अस्वस्थता के चलते उन्होंने बुधवार को अपने पति इंदरचंद सुराना व परिजन के सामने संथारा व्रत की इच्छा जाहिर की। इसके बाद गुरू आचार्य श्रीरामलाल से आज्ञा लेकर गुरुवार को सुबह 7 बजे तिविहार संथारा शुरू किया। गुरु से संथारा की अनुमति मिलने के साथ ही नवकार महामंत्र का जाप शुरू कर दिया गया। मंत्र जाप के बीच बाद पुष्पा देवी समाधि की ओर अग्रसर हैं।

महासती हेमप्रभा ने कराया पच्चखाण
गुरू आचार्य रामलाल महाराज की अनुमति के बाद उनकी शिष्या महासती हेमप्रभा ने पुष्पादेवी को तिविहार संथारा का व्रत धारण कराया। इसके लिए उन्होंने पुष्पा देवी को गुरू आज्ञा की जानकारी देकर व्रत की प्रक्रिया समझाई। इसके बाद उन्होंने विधिवत संथारा लिया।

डॉक्टरों ने दी घर में इलाज की सलाह
पुष्पादेवी के पुत्र साइंस कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अभिनेष सुराना ने बताया कि मां करीब 6 माह से अस्वस्थ्य थींं। इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनकी अधिक उम्र को देखते हुए घर में ही उपचार कराने की सलाह दी। इस पर उन्हें घर लाया गया। इसके बाद उन्होंने संथारा की इच्छा जाहिर की थी।

तिविहार संथारा में केवल मांगने पर पानी देने की है अनुमति
पुष्पादेवी तिविहार संथारा कर रहीं हैं। जैन समाज के प्रतिनिधियों के मुताबिक इसमें साधक के मांगे जाने पर ही केवल पानी दिए जाने की अनुमति होती है। जबकि चौविहार संथारा में इसकी भी अनुमति नहीं होती।

चार माह के भीतर शहर में दूसरी संथारा
चार माह के भीतर शहर में यह दूसरी संथारा है। इसके पहले इसी साल फरवरी में महावीर कॉलोनी की शोभा देवी पति टीकमचंद भंडारी ने संथारा लिया था। इसके पूर्व अगस्त 2015 में दिगंबर संप्रदाय के मुनि आध्यात्म सागर ने भी यहां संलेखना कर देह त्याग किया था।

अंतिम साधना है संथारा
जैन धर्म में स्वेच्छा से देह त्यागने की साधना को संथारा कहा जाता है। जैन धर्म के दूसरे पंथ दिगम्बर इसे सल्लेखना कहते हंै। संथारा लेने वाले व्यक्ति को अपने परिवार के सदस्यों और गुरु से निर्देश प्राप्त करना आवश्यक है। सूर्योदय के साथ शुरू होने वाले संथारा में अन्न जल का त्याग कराया जाता है और भगवान महावीर के उपदेश के साथ ही नवकार मंत्र का अंखड जाप किया जाता है।