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CSVTU में 67 पदों पर भर्ती के आवेदन में सैकड़ों डिग्रियां फर्जी, दावा आपत्ति में सामने आया सच

तकनीकी विश्वविद्यालय में 67 पदों पर होने वाली सीधी भर्ती के लिए आवेदन करने वालों में से बहुत सी डिग्रियां फर्जी विश्वविद्यालयों की भी थीं।
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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jan 03, 2018

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भिलाई. छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय में 67 पदों पर होने वाली सीधी भर्ती के लिए आवेदन करने वालों में से बहुत सी डिग्रियां फर्जी विश्वविद्यालयों की भी थीं। सीएसवीटीयू प्रशासन ने ऐसे आवेदकों को अपात्र घोषित करते हुए दावा-आपत्ति का जो समय दिया था, वह ३१ दिसंबर को समाप्त हुआ। दस दिनों के भीतर यानि २१ से ३१ दिसंबर तक विवि को दो सौ से अधिक दावा-आपत्तियां मिली हैं, जिनमें आवेदकों ने अपनी डिग्री या स्कूल सर्टिफिकेट की मान्यता के सबूत पेश किए हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि फर्जी डिग्री व गैरमान्यता प्राप्त स्कूल सर्टिफिकेट के भरोसे आवेदन करने वालों की संख्या सैंकड़ों में थीं, लेकिन दावा आपत्ति लगाने सिर्फ 20 फीसदी आवेदक ही शामिल हुए। इसी तरह अमान्य डिग्री के भरोसे आवेदन करने वाले 80 फीसदी आवेदकों ने अपने कदम पीछे खींच लिए। सीएसवीटीयू प्रशासन अब इन आपत्तियों का निराकरण करने के बाद इस महीने के आखिर तक फाइनल मेरिट सूची जारी करने की योजना बना रहा है।

मूल निवास नहीं पूछा फिर भी आवेदन खारिज
इसमें गौर करने वाली बात यह है कि विवि प्रशासन ने फार्म में कहीं भी छत्तीसगढ़ मूल निवासी का जिक्र तक नहीं किया। इस बात से अनजान हजारों बाहरी अभ्यर्थियों ने भी धड़ल्ले से आवेदन किए। सीधी भर्ती में कोई शुल्क नहीं होने की वजह से भी अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। अब विवि ने तर्क दिया है कि ऐसे अभ्यर्थी पात्र नहीं माने जाएंगे। दूसरी ओर पात्र-अपात्र अभ्यर्थियों को पृथक करने में विवि ने बड़ा मैनपॉवर लगाया है, जो फिजुल में ऐसे अभ्यर्थियों की छटनी में जुटा है, जो पहले से ही अपात्र हैं।

पहले ही मिली दो हजार आपत्तियां
इन पदों पर आए ४८०२७ आवेदनों में से करीब ३२ हजार अभ्यर्थी पात्र हुए हैं। विवि प्रशासन ने अपात्र अभ्यर्थियों को दावा-आपत्ति के लिए १९ जून तक का समय दिया था। नियुक्तियों के आवेदन करने के बाद यह पहली दावा-आपत्ति थी, जिसमें दो हजार से अधिक आवेदकों ने अपील की। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हुई। इतनी बड़ी संख्या में आई दावा-आपत्तियों का निराकरण करने में भी सीएसवीटीयू प्रशासन को महीनों का समय लग गया।

कैसे और कहां होगी परीक्षा, कुछ तय नहीं
आवेदनों की अधिक संख्या होने की वजह से विवि कटऑफ तय करेगा, जिसके मुताबिक अधिकतम प्रतिशत व अनुभव के मद्देनजर अभ्यथियों को कौशल परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। खास बात यह है कि अब विवि यह तय नहीं कर पाया है, कि हजारों उम्मीदवारों की कौशल परीक्षा कैसे और कहां होगी। विवि ने नियुक्तियों के लिए किसी परीक्षा एजेंसी का भी सहारा नहीं लिया है।

कौशल व लिखित परीक्षा को लेकर फिलहाल सीएसवीटीयू प्रशासन के पास कोई खास तैयारी नहीं है। रजिस्ट्रार सीएसवीटीयू डीएन सिरसांत ने बताया कि जनवरी के आखिर तक मेरिट सूची जारी करने की योजना है। फिलहाल विश्वविद्यालयों की डिग्री के संबंध में दो सौ से अधिक दावा-आपत्तियां आई हैं। इनका निराकरण किया जा रहा है।

नियुक्तियों के लिए मिले आवेदनों में सबसे अधिक मामले फर्जी विवि या इंस्टिट्यूट से कंप्यूटर प्रमाण पत्र या डिग्री को लेकर सामने आए है। इसी तरह दूरस्थ शिक्षा विश्वविद्यालयों से डिग्री लेने वालों को भी सीएसवीटीयू ने अमान्य किया। प्रदेश में सिर्फ दो ही विश्वविद्यालयों को दूरस्थ शिक्षा की मान्यता है, इनमें से एक निजी व एक शासकीय विवि है।

अधिकारियों का कहना है कि निजी विश्वविद्यालयों से ली गई डिग्रियों में कई तरह के पेंच सामने आए, जिस वजह से आवेदकों को अमान्य किया गया। यूजीसी ने फर्जी बोर्ड और विश्वविद्यालय की सूची जारी की है। इनमें जो विवि शामिल हैं, उनकी मार्कशीट से कई आवेदन आए हैं। ४८ हजार आवेदनों में से मान्यता प्राप्त बोर्ड और विवि को छांटना भी विवि के लिए सिरदर्द बना। नियुक्तियों में हो रही देरी के पीछे यह भी एक कारण बताया जा रहा है।