
CISF DIG नागेंद्र नाथ त्रिपाठी (photo source- Patrika)
CISF DIG Transfer: भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में करोड़ों रुपए के लोहा चोरी कांड के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम में भिलाई स्थित सीआईएसएफ इकाई के डीआईजी नागेंद्र नाथ त्रिपाठी का दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन इसे बीएसपी में सामने आए बहुचर्चित लोहा चोरी मामले से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
बीएसपी देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों में से एक है, जहां संयंत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के पास है। ऐसे में बड़े पैमाने पर लोहे और स्क्रैप की चोरी के खुलासे ने न केवल प्रबंधन बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
भिलाई इस्पात संयंत्र में पिछले कुछ समय से संगठित तरीके से लोहे और स्क्रैप की चोरी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि संयंत्र परिसर से बड़ी मात्रा में लोहे का अवैध रूप से बाहर निकाला जा रहा था। मामले में कई बिचौलियों, ठेकेदारों और कथित रूप से अंदरूनी नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार चोरी का यह खेल लंबे समय से चल रहा था और इसमें करोड़ों रुपये के सरकारी संसाधनों को नुकसान पहुंचाया गया। मामले के उजागर होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।
लोहा चोरी कांड सामने आने के बाद बीएसपी प्रबंधन, पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने मामले की जांच तेज कर दी है। चोरी में शामिल लोगों की पहचान, माल की आवाजाही, परिवहन नेटवर्क और सुरक्षा में हुई चूक की जांच की जा रही है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री संयंत्र परिसर से बाहर कैसे पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था में कहां-कहां कमजोरियां रहीं। सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
इसी बीच सीआईएसएफ के डीआईजी का दिल्ली ट्रांसफर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि विभागीय स्तर पर इसे सामान्य प्रशासनिक फेरबदल बताया जा रहा है, लेकिन बीएसपी लोहा चोरी प्रकरण के बीच हुए इस बदलाव को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान में सुरक्षा चूक का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा स्वाभाविक है। ऐसे में शीर्ष स्तर पर बदलाव को इसी संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
भिलाई इस्पात संयंत्र जैसी संवेदनशील औद्योगिक इकाई में सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू है। इसके बावजूद यदि बड़ी मात्रा में लोहा और स्क्रैप बाहर निकलता रहा, तो यह सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले के बाद केवल चोरी की जांच ही नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल, निगरानी तंत्र और जवाबदेही की भी व्यापक समीक्षा की आवश्यकता है।
Updated on:
25 Jun 2026 06:33 pm
Published on:
25 Jun 2026 06:07 pm
बड़ी खबरें
View Allभिलाई
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
