
विलुप्त होते कोदो चावल को देशभर में पहचान दिलाने वाली ये है छत्तीसगढ़ की सेवती, आइडिया ऐसा कि मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
रायपुर. गरियाबंद के छुरा ब्लॉक के कोठी गांव में आदिवासी लोगों की बसावट है। इसी गांव की 5वीं पास सेवती ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां ंबटोरीं। बहुत ज्यादा नहीं पढ़ीं, लेकिन खुद के साथ हो रहे अत्याचार, अपमान ने सेवती को इतना मजबूत बना दिया कि वह पहले थाने पहुंचीं फिर पंचायत और अंत में जिला पंचायत के सीईओ के पास जा पहुंचीं। एक एकड़ में महिलाओं के साथ विलुप्त होते 'कोदो चावल की खेती शुरू की और इसकी मार्केंटिंग प्लान को समझाने के लिए वह पुणे तक गर्इं। अब बड़े पैमाने पर कोदो की खेती कर रही हैं।
हर महिला को मिला सम्मान
महिलाएं कोदो की खेती तो कर ही रही हैं, साथ ही राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत हल्दी, मिर्ची और धनिए को पीसकर बेच भी रही हैं। इसके अलावा सीताफल की खेती कर उन्हें भी बाजार में बेच रही हैं। सेवती कहती है मेरे पति जो कभी लड़ते-झगड़ते थे, अब मेरा सम्मान और मदद करते हैं। यह सम्मान यहां की लगभग हर महिला को मिला है।
इनके आइडिया को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
सेवती कहती है जब जाना कि हमें खुद से आत्मनिर्भर होना पड़ेगा तभी हम हर मुसीबत का सामना कर सकते हंै। उन्होंने महिलाओं को एकजुट करना शुरू किया। वन अधिकार अधिनियम के तहत महिलाओं को मिली जमीन पर सेवती ने कोदो चावल की खेती शुरू की और मार्केटिंग के आइडिया बनाए, जो लोगों को पसंद आने लगे। एक सामाजिक संस्था के जरिए पुणे गर्इं, जहां उन्हें इस आइडिया के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
Published on:
11 Oct 2020 05:34 pm

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