28 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Human story : अस्पताल के टैग ने मृत नवजात को लावारिश होने से बचा लिया

दादी ने ही मृत पैदा हुई पोती को बहू को बिना बताए रात के अंधेरे में कचरे में फेंक दिया। ऐसा करते हुए उनकी ममता भी आड़े नहीं आई।

2 min read
Google source verification
Durg news

अस्पताल के टैग ने मृत नवजात को लावारिश होने से बचा लिया

दुर्ग. कहते है कि मां-बाप से ज्यादा बच्चों (नाती-पोते) पर प्रेम दादा-दादी की उमड़ता है। किंतु यहां एक मामला ऐसा आया है जहां दादी ने ही मृत पैदा हुई पोती को बहू को बिना बताए रात के अंधेरे में कचरे में फेंक दिया। ऐसा करते हुए उनकी ममता भी आड़े नहीं आई। निष्ठुर दादी की करतूत पौ फटते ही लोगों के सामने आ गई।

जल कलश के नजदीक नवजात बच्ची का शव लावारिश पड़ा था
बुधवार की सुबह जिला अस्पताल के सामने बने जल कलश के नजदीक नवजात बच्ची का शव लावारिश पड़ा था। लाल रंग की काटन साड़ी में लिपटे नवजात के शव पर चीटियां रेंक रही थी। जब लोगों की नजर पड़ी तब शव को कचरे से उठाकर अलग रखा गया। अमानवीय कृत्य करने वाली महिला (दादी) को जिला अस्पताल के नगर सैनिकों ने जल्द ही ढूंढ निकाला। अस्पताल के नगर सैनिकों ने इसकी जानकारी आरएमओ को दी और शव को कूड़े के ढेर से बाहर निकाला। थोड़ी देर में नगर सैनिकों ने प्रसूति वार्ड से उस महिला को ढूंढ लिया जिसने यह कृत्य किया था।

अंतिम संस्कार की समझाइश दी

उतई थाना क्षेत्र की ग्राम कोपेडीह निवासी तीरथबाई पटेल (५० वर्ष) ने अनजाने में अपराध करने की बात स्वीकार कर ली। जिला अस्पताल के अधिकारियों ने शव को उठाकर उसे विधिवत अंतिम संस्कार करने की समझाइश दी।

टैग से हुई पहचान
प्रसव के बाद नवजात के हाथ में टैग लगाया गया था। टैग में माता का नाम हिरौंदी बाई लिखा था। टैग को नगर सैनिकों ने पहचान लिया और सीधे स्टाफ नर्स से हिरौंदी के बारे में जानकारी ली। जनरल वार्ड में भर्ती हिरौंदी की पहचान के बाद मामले का खुलासा हुआ।

साथ में कोई नहीं इसलिए फेंक दिया
नगर सैनिकों ने नवजात को खुले में फेंकने वाली तीरथ बाई को सिविल सर्जन डॉ. केके जैन के सामने ले गए। महिला ने कहा कि बच्ची मृत मिलने पर वह कुछ समझ नहीं पाई। ग्रामीण परिवेश में पली बढ़ी होने और अनजान जगह के कारण उसे समझ नहीं आया कि मृत नवजात को कहां रखूं। कूड़े के ढेर में यह सोच फेंक दिया कि सुबह सफाई कर्मचारी उठाकर शव को दफना देंगे। सिविल सर्जन की समझाइश के बाद महिला ने शव को वापस लेकर अंतिम संस्कार करने की बात कही। तब मामला शांत हुआ।

मृत पैदा हुई थी बच्ची
ग्राम कानाकोट उतई निवासी मनोज (३०) अपनी पत्नी हिरौंदी पटेल को प्रसव के लिए जिला अस्पताल लेकर आया था। आधी रात प्रसव होने के बाद स्टाफ नर्स ने बच्चे को अंतिम संस्कार के लिए दे दिया था। प्रसूता के साथ उसकी सास तीरथ बाई थी। प्रसूता को मृत बच्ची पैदा होने की जानकारी देकर सास तीरथ बाई ने नवजात का शव अस्पताल के समीप कचरे में फेंक दिया।