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न्यू इयर को स्पेशल बनाना है तो जाइए छत्तीसगढ़ के मिनी गोवा में, यहां की वादियां, वाटर स्पोट्र्स के साथ बहुत कुछ है पर्यटकों के लिए खास

वीकेंड के साथ-साथ न्यू इयर सेलिब्रेशन के लिए यदि आप छत्तीसगढ़ में ही गोवा सा मजा लेना चाहते हैं तो धमतरी से मात्र 10 किलोमीटर दूर गंगरेल डैम में गोवा सा मजा ले सकते हैं।
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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 26, 2021

न्यू इयर को स्पेशल बनाना है तो जाइए छत्तीसगढ़ के मिनी गोवा में, यहां की वादियां, वाटर स्पोट्र्स के साथ बहुत कुछ है पर्यटकों के लिए खास

न्यू इयर को स्पेशल बनाना है तो जाइए छत्तीसगढ़ के मिनी गोवा में, यहां की वादियां, वाटर स्पोट्र्स के साथ बहुत कुछ है पर्यटकों के लिए खास

भिलाई. वीकेंड के साथ-साथ न्यू इयर सेलिब्रेशन के लिए यदि आप छत्तीसगढ़ में ही गोवा सा मजा लेना चाहते हैं तो धमतरी से मात्र 10 किलोमीटर दूर गंगरेल डैम में गोवा सा मजा ले सकते हैं। जिला मुख्यालय दुर्ग से इसकी दूरी करीब 90 किलोमीटर है। गंगरेल बांध को रविशंकर बांध भी कहा जाता है। धमतरी जिले में स्थित इस बांध का निर्माण महानदी पर हुआ है। 1978 में बनाया गया था। गंगरेल बांध अब इसपर लेक व्यू प्रोजेक्टर पूरा होने के बाद यह देश का सबसे खूबसूरत आर्टिफिशयल बीच बन चुका है। इस बांध को लेकर एक धार्मिक मान्यता भी है कि बांध के एक छोर पर अदि शक्ति मां अंगार मोती की प्रतिमा स्थापित है जो पहले कऱीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम चंवर में स्थापित थी, लेकिन अब यह गांव डूबान में आ चुका है लेकिन मंदिर अभी भी है।

बांध का तट लगता है हुबहू किसी समुद्री तट जैसा
गंगरेल बांध के पास करीब 1 किलोमीटर के दायरे में एक आर्टिफिशियल बीच को बनाया गया है जो ट्रायबल टूरिज्म सर्किट का हिस्सा है। बांध का यह तट हुबहू किसी समुद्री तट की तरह नजर आता है और यहां उसी स्तर की सुविधाएं मुहैया की गई हैं। यहां एथनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन डेवलपमेंट के अंतर्गत लॉग हट्स, कैफेटेरिया, गार्डन, पगोड़ा, वॉटर स्पोट्र्स की सुविधा विकसित की गई है। पैरासीलिंग, प्लायबोर्ड, ऑकटेन, जार्बिन बॉल, पी.डब्ल्यू.सी.बाईक, बनाना राईड, सौ सीटर शिप, वॉटर सायकल, कयाक, पायडल बोट्स आदि का लुत्फ सैलानी यहां उठा सकते हैं।

ओना-कोना मंदिर
बालोद और धमतरी जिले के सीमा लगा "ओना-कोना" छत्तीसगढ़ के एक कोने में बसा है। ये भव्य मंदिर, धमतरी जिले से लगभग 35-40 कि.मी. दूर नेशनल हाइवे-30 जगदलपुर रोड में स्थित है। कहा जाता है कि ये गंगरेल का आखरी छोर भी है एक बार जरूर जाइए। आप भी एक बार ओना-कोना का सुंदर नज़ारा देखने जरूर जाइए। ओनाकोना जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह बालोद जिले के गुरुर विकासखंड के कोने में महानदी के तट पर स्थित है जहां पर गंगरेल बांध का डुबान क्षेत्र आता है। यह गांव एक पहाड़ी के नीचे स्थित है। यहां आने के लिए उबड़ खाबड़ रास्ते को पार करना पड़ता है। वैसे तो यह जगह प्राकृतिक रूप से काफी खूबसूरत है।

गंगरेल बांध का डुबान क्षेत्र होने की वजह से यह और भी ज्यादा खूबसूरत लगता है यहां स्थानीय मछुआरों द्वारा बोटिंग की सुविधा भी आने वाले लोगों को दी जाती है। हाल ही में कुछ वर्षों से यह जगह यहां निर्मित हो रहे भव्य मंदिर के लिए काफी चर्चित है। जिसे धमतरी के किसी व्यवसायी द्वारा बनाया जा रहा है, एक और बात है जो अधिकतर लोगों को नहीं पता होती गांव वालों के अनुसार यहां पर बहुत साल पहले सूफी संत (बाबा फरीद) आए थे। उन्होंने यहां बैठ कर तपस्या की थी तब से यहां पर एक धुनी जलाई गई है, जो कि आज भी निरंतर गांव वालों के सहयोग से जल ही रही है। कहते हैं यहां पर आने वाले और उनके मानने वाले लोगों की मुरादें पूरी होती है। यहां पर एक मजार का भी निर्माण किया गया है जो की मंदिर के पास में ही लगा हुआ है। यह जगह अब हमारे देश की गंगा जमुनी तहजीब की एक मिसाल पेश करता है।