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CG के दिव्यांग National खिलाड़ी अंजान शहर में फंसे बड़ी मुसीबत में, पत्रिका की पहल पर ITBP ने बढ़ाया मदद का हाथ

भिलाई पत्रिका (Bhilai patrika) ने इन दिव्यांग व्हीलचेयर बॉस्केटबॉल प्लेयर्स (wheelchair basketball) की मदद का बीड़ा उठाया। आईटीबीपी (ITBP) चंडीगढ़ में कमांडेंट सुरिन्दर खत्री से बात की। (Bhilai sports news)

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jun 30, 2019

wheelchair Basket ball team

CG के दिव्यांग National खिलाड़ी अंजान शहर में फंसे बड़ी मुसीबत में, पत्रिका की पहल पर ITBP ने बढ़ाया मदद का हाथ

भिलाई. अपनी हिम्मत और हौसले से व्हीलचेयर बॉस्केटबॉल (wheelchair basketball) की नेशनल चैम्पियनशिप (National championship) में मोहाली गई छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की टीम के सदस्य उस वक्त मायूस हो गए थे, जब उनके अंबाला से मोहाली तक पहुंचने की सुविधा नहीं थी। 21 जून को टीम के रवाना होने से पहले ही कोच निखिलेश शर्मा परेशान थे कि वे अंबाला से दिव्यांग खिलाडिय़ों को मोहाली तक कैसे लेकर जाएंगे? क्योंकि वहां के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करना प्लेयर्स के लिए इतना आसान नहीं था और अंबाला से व्हीलचेयर के साथ प्लेयर्स (Players) को ट्रेन (Train) में चढ़ाने में भी मुसीबत थी। (Bhilai Sports news)

पत्रिका की पहल रंग लाई
निखिलेश ने अपनी इस परेशानी को जब शेयर किया तो भिलाई पत्रिका (Bhilai patrika) ने इन दिव्यांग प्लेयर्स की मदद का बीड़ा उठाया। आईटीबीपी (ITBP) चंडीगढ़ में कमांडेंट सुरिन्दर खत्री से बात की। उन्होंने भी इन खिलाडिय़ों को मदद का भरोसा दिलाया और मोहाली तक पहुंचाने गाड़ी का इंतजाम किया। अंजान शहर में मदद पाकर दिव्यांगों की इस टीम के हर खिलाडिय़ों के चेहरे खिल गए और कोच ने भी राहत की सांस ली। (Bhilai sports news)

फंड की थी दिक्कत
व्हीलचेयर बॉस्केटबॉल टीम (wheelchair basketball) के पास दरअसल फंड की कमी थी। स्टेट में एफिलेशन नहीं होने के कारण टीम को टूर्नामेंट में शामिल होने का कोई खर्च नहीं मिलता। कोच निखिलेश और उनके साथियों ने टिकट का इंतजाम कर लिया, लेकिन जब अंबाला से मोहाली जाने की बात आई तो फेडरेशन ने कहा कि उनके पास मोहाली स्टेशन से आयोजन स्थल तक वाहन की सुविधा है, वे अंबाला लेने नहीं आ सकते। टीम में 24 सदस्य थे। ऐसे में कमांडेंट खत्री की मदद अंधेरे में रोशनी बनकर आई। गेम खत्म होने के बाद रविवार को टीम अब वापस छत्तीसगढ़ लौट कर आ रही है। स्पर्धा में छग की पुरुष और महिला टीम ने अपना बेहतर प्रदर्शन किया। प्री क्वार्टर फाइनल तक पहुंची।

जानिए कौन है कमाण्डेंट सुरिन्दर खत्री
आईटीबीपी (ITBP) के कमांडेंट सुरिन्दर खत्री का छत्तीसगढ़ में भी नाता रहा है। पिछले साल तक वे कोंडागांव में तैनात आईटीबीपी की 41 बटालियन में कमांडेंट रह चुके हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को निखारने काफी मेहनत की। अपने नेशनल प्लेयर जवानों की मदद से कई खेल की कोचिंग शुरू की और आदिवासी बच्चों को हर जरूरत का सामान भी उपलब्ध कराया। जिसकी वजह से पिछले दो साल से स्कूल गेम में कोंडागांव जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर पदक लेने लगे हैं।

आदिवासी बच्चों की इन खेल प्रतिभा की चर्चा राष्ट्रपति भवन तक भी पहुंची थी। जहां पिछले साल जनवरी में राष्ट्रपति ने इन बच्चों से मुलाकात भी की थी। कमांडेंट खत्री कहते हैं कि उन्होंने खिलाडिय़ों की मदद कर कोई खास काम नहीं किया, लेकिन उन्हें खुशी है कि उन खिलाडिय़ों को वक्त पर मदद मिल गई। (Bhilai sports news)

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