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अब बच्चों के लिए बंद होंगे इस शहर के खेल मैदान! एमआईसी बैठक में जाएगा प्रस्ताव, जानिए वजह…

Bhilai News: अपनी आय बढ़ाने के नाम पर अब ऐसे फैसलों की ओर कदम बढ़ा दिए हैं, जिनका सीधा असर आम जनता और खासकर बच्चों पर पड़ेगा। निगम ने भवनों के बाद अब शहर के गार्डन और खेल मैदानों को किराए पर देने का मसौदा तैयार कर लिया है।

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अब बच्चों के लिए बंद होंगे खेल मैदान! (फोटो सोर्स- पत्रिका)

अब बच्चों के लिए बंद होंगे खेल मैदान! (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: नगर निगम भिलाई ने अपनी आय बढ़ाने के नाम पर अब ऐसे फैसलों की ओर कदम बढ़ा दिए हैं, जिनका सीधा असर आम जनता और खासकर बच्चों पर पड़ेगा। निगम ने भवनों के बाद अब शहर के गार्डन और खेल मैदानों को किराए पर देने का मसौदा तैयार कर लिया है। इस प्रस्ताव को दो दिन पहले हुई एमआईसी बैठक में चर्चा के बाद अगली बैठक में मंजूरी के लिए रखने का निर्णय लिया गया है। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो शहर के कई प्रमुख खेल मैदानों में बच्चों का मुफ्त और स्वतंत्र रूप से खेलना मुश्किल हो जाएगा।

CG News: किराए पर देने से क्या बदलेगा?

बच्चे स्वतंत्र रूप से मैदान या उद्यान में नहीं जा पाएंगे। एजेंसियां रखरखाव के बदले शुल्क वसूली करेंगी। खेल मैदानों का उपयोग शादी-विवाह व अन्य आयोजनों में होगा। हालांकि महापौर का दावा है कि व्यवस्था नो प्रॉफिट-नो लॉस पर होगी, लेकिन सवाल यह है कि बिना लाभ के कोई एजेंसी आखिर क्यों आगे आएगी।

भवन किराए पर दिए, अब मैदान भी आमजन से दूर

इससे पहले नगर निगम ने कैंप-2 बैकुंठधाम स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर भवन को किराए पर दिया। जिस एजेंसी को भवन सौंपा गया, उसने इतनी अधिक किराया दर तय की कि वह श्रमिक बहुल क्षेत्र के गरीब तबके की पहुंच से बाहर हो गया। गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार अपने ही क्षेत्र में बने भवन का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अब इसी तर्ज पर खेल मैदानों को भी किराए पर देने की तैयारी ने चिंता बढ़ा दी है।

30 साल लीज : शर्तों पर भी सवाल

गौरतलब है कि वर्तमान भिलाई नगर निगम पूर्व में साडा (विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण) के रूप में कार्यरत था। उस समय भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) द्वारा साडा को कई भूखंड 30 वर्ष की लीज पर दिए गए थे। लीज की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि गार्डन का उपयोग केवल उद्यान के रूप में और खेल मैदान का उपयोग सिर्फ खेल गतिविधियों के लिए ही किया जाएगा।

अब नगर निगम द्वारा रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिन पर एमआईसी की आगामी बैठक में निर्णय लिया जाना है। इस प्रक्रिया को लेकर आशंका जताई जा रही है कि यदि भू-उपयोग बदला गया, तो यह लीज शर्तों का उल्लंघन माना जा सकता है।

एजेंसियों के जरिए होगा रखरखाव

प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम जिन खेल मैदानों को किराए पर देने की तैयारी में है, उनमें वार्ड-14 शांतिनगर फुटबॉल मैदान, वार्ड-23 घासीदासनगर फुटबॉल ग्राउंड, वार्ड-24 हाउसिंग बोर्ड क्रिकेट स्टेडियम, वार्ड-25 जवाहर नगर स्पोट्र्स कॉम्प्लैक्स शामिल हैं।

वर्तमान में इन मैदानों का रखरखाव नगर निगम करता है और यहां खेल अकादमियों के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। यदि मैदान किराए पर दिए गए, तो उनका संपूर्ण संचालन, रखरखाव और उपयोग एजेंसी के हाथ में होगा। इससे निगम का खर्च तो कम होगा, लेकिन आशंका है कि किराया वसूली के कारण खिलाड़ी और बच्चे मैदान से दूर हो जाएंगे।

नीरज पाल, महापौर भिलाई निगम

नगर निगम भवन, गार्डन और खेल मैदान किराए पर क्यों देना चाहता है?

जवाब - ऐसा नहीं है। नगर निगम ने 138 गार्डन बनाए हैं। मवेशी घुसकर उन्हें खराब कर रहे हैं। यदि महिला समितियां नो प्रॉफिट-नो लॉस पर लेंगी तो सुरक्षा और रखरखाव बेहतर होगा।

एजेंसी रखरखाव पर खर्च करेगी तो वसूली कैसे करेगी?

जवाब - केवल वही समितियां ली जाएंगी जो नो प्रॉफिट-नो लॉस पर काम करेंगी।

इससे आम जनता के हित पर असर नहीं पड़ेगा?

जवाब - निगम का उद्देश्य आय बढ़ाना नहीं है, केवल रखरखाव सुनिश्चित करना है।

शहर के गार्डन और खेल मैदानों को किसी और को सौंपने का काम महापौर और परिषद कर रही है। यदि नगर निगम उद्यान और खेल मैदान नहीं चला सकता, तो किसी और को देने का अधिकार भी नहीं है। इसका विरोध किया जाएगा। यदि किसी समिति को देना ही है तो उसकी संपत्तिकर आईडी बनाकर पारदर्शिता रखी जाए। - भोजराज सिन्हा नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम भिलाई