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लता मंगेशकर से छत्तीसगढ़ी गीत गवाने गीतकार को रखना पड़ा था पूरे दिन उपवास, जानिए कैसे छॉलीवुड को स्वर कोकिला ने दी पहली आवाज

लता मंगेशकर की आवाज में गाया पहला छत्तीसगढ़ी गीत 22 फरवरी 2005 को मुंबई के स्वरलता स्टूडियो में रिकॉर्ड किया था।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 05, 2021

लता मंगेशकर से छत्तीसगढ़ी गीत गवाने गीतकार को रखना पड़ा था पूरे दिन उपवास, जानिए कैसे छालीवुड को स्वर कोकिला ने दी पहली आवाज

लता मंगेशकर से छत्तीसगढ़ी गीत गवाने गीतकार को रखना पड़ा था पूरे दिन उपवास, जानिए कैसे छालीवुड को स्वर कोकिला ने दी पहली आवाज

भिलाई. स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) एक ऐसी शख्सियत जिसने संगीत की दुनिया में अलग ही मुकाम हासिल किया है। क्या आप जानते हैं लता मंगेशकर जी का नाम छत्तीसगढ़ी फिल्मों से भी जुड़ा है। उन्होंने एक ऐसा यादगार छत्तीसगढ़ी गीत गाया है जो आज भी लोगों की जुबान से उतरा नहीं है। वैसे तो छालीवुड (Chhollywood Movies) में कई फनकार है लेकिन लता मंगेशकर से गीत गवाने के लिए यहां के गीतकार और डायरेक्टर को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। तब जाकर 16 साल पहले साल 2005 में उन्होंने छालीवुड को अपनी नायाब आवाज से पहचान दी थी।

मिठाई खिलाने दिया था 50 हजार रुपए
लता मंगेशकर की आवाज में गाया पहला छत्तीसगढ़ी गीत 22 फरवरी 2005 को मुंबई के स्वरलता स्टूडियो में रिकॉर्ड किया था। साथ ही लता मंगेशकर ने लोगों को मिठाई खिलाने गीतकार मदन को 50 हजार रुपए दिए थे। एक इंटरव्यू के दौरान छत्तीसगढ़ के मशहूर गीतकार मदन शर्मा ने बताया कि लता दीदी को गाने के लिए राजी करना उनकी जिंदगी का अब तक का सबसे मुश्किल काम रहा है। इस काम के लिए चार बार मुंबई के चक्कर लगाने पड़े।

लता जी से गाना गंवाने रखा था व्रत
नवंबर 2004 से लेकर फरवरी 2005 तक चार बार मुंबई के चक्कर लगाए, तब जाकर लता दी से गाने के लिए हां सुनने मिला। पहली बार गए तो पता चला कि वो विदेश गई हैं। दूसरी बार गए तो वो पुणे में थीं। तीसरी बार भी कुछ ऐसा ही हुआ और चौथी बार में ऊषा जी के जरिए उनसे मुलाकात हुई और हमने रिकॉर्डिंग की। बार मैंने तय कर लिया था कि जब तक लता दी गाना रिकॉर्ड नहीं कर लेंगी तब तक उपवास रखूंगा। शाम 6 बजे रिकॉर्डिंग के बाद ही मैंने व्रत तोड़ा।

फिल्म भखला के लिए गाया था ये मशहूर गीत
लता मंगेशकर ने छत्तीसगढ़ी फिल्म भखला के लिए गीत गाया। इस गीत को लता दीदी ने छत्तीसगढ़ी बोली में ही गाया था। गीत के बोल हैं, छूट जाही अंगना अटारी .... छूटही बाबू के पिठइया। शादी की विदाई पर आधारित गीत मदन शर्मा ने लिखा था और संगीतकार थे कल्याण सेन। गीतकार मदन को लता ने फीस की तय रकम 2 लाख में से 50 हजार रुपए मिठाई खाने के लिए लौटाते हुए कहा था कि ये मेरा पहला छत्तीसगढ़ी गीत है तो सबको मेरी तरफ से मिठाई खिलाना।

खैरागढ़ यूनिवर्सिटी ने नवाजा है डी-लिट की उपाधि से
मशहूर गायिका लता मंगेशकर की छत्तीसगढ़ से एक और याद जुड़ी है। 9 फरवरी 1980 को खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत यूनिवर्सिटी ने लता मंगेशकर को संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए डी-लिट की उपाधि से नवाजा था।

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