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एशिया के सबसे बड़े प्लांट में घट गए 65 फीसदी कर्मी

बीएसपी में पांच साल के दौरान 1762 कार्मिकों को रोजगार दिए हैं। वहीं विशाखापट्टनम स्टील प्लांट में 2163 कार्मिकों, दुर्गापुर स्टील प्लांट में 2776 कार्मिकों की भर्ती की गई।

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भिलाई

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Abdul Salam

Jul 11, 2019

BHILAI

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भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र में पिछले पांच साल के दौरान 1762 कार्मिकों को रोजगार दिए हैं। वहीं विशाखापट्टनम स्टील प्लांट में 2163 कार्मिकों और दुर्गापुर स्टील प्लांट में इस दरमियान में 2776 कार्मिकों की भर्ती की गई। बीएसपी बेहतर उत्पादन और मुनाफा देने के बाद भी नई भर्ती में इनसे पीछे रहा है। हमेशा मुनाफे में रहने वाले बीएसपी में सेल प्रबंधन कम से कम कार्मिकों की भर्ती कर रहा है। नए वित्त वर्ष में तो अब तक भर्ती हुई ही नहीं है, जबकि दूसरे प्लांट में नए कार्मिकों की भर्ती वित्त वर्ष के पहले माह से ही शुरू हो जाती है।

बीएसपी को क्यों चाहिए अधिक कार्मिक
बीएसपी bhilai steel plant के 47 फैक्ट्री में अनुभवी कर्मियों की संख्या घट रही है, पुराने उपकरण में दिक्कत आ रही है, तो उसे दूर करने के लिए अति कुशल हाथ की कमी महसूस की जा रही है। प्रबंधन सिर गिनाने के लिए मजदूरों को उस विभाग में जोड़ रहा है। यहां उनसे वह काम नहीं हो रहा, जो कार्य नियमित कर्मचारी करते रहे हैं।

हर साल हो रहे 1000 से 1100 कार्मिक रिटायर्ड
बीएसपी से हर साल 1000 से 1100 कार्मिक रिटायर्ड हो रहे हैं। इस तरह से पिछले पांच साल में बड़ी संख्या में कार्मिक रिटायर्ड हुए हैं। जिसका असर उत्पादन व मेंटनेंस दोनों जगह पर देखा जा रहा है।

प्रबंधन रिटायर्ड संख्या से 20 फीसदी
सेल, बीएसपी प्रबंधन को रिटायर्ड हो रहे कार्मिकों की संख्या का औसत निकालकर 20 फीसदी की नई भर्ती करनी है। पिछले पांच साल में जितने कार्मिक रिटायर्ड हुए हैं, उसके अनुपात में बीस फीसदी कार्मिकों की नई भर्ती नहीं हुई है।

हर साल घटती गई नई भर्तियों की संख्या
बीएसपी में नए कार्मिकों की भर्ती की संख्या हर साल घटती गई है। वित्त वर्ष 2014-15 में जहां यह संख्या 553 थी, तो वह 2017-18 में 159 और वित्त वर्ष 2018-19 में 85 तक रह गई। स्थाई कर्मचारी जिस जिम्मेदारी से काम को अंजाम देते हैं, उस तरह की जवाबदारी ठेका मजदूरों से करना उचित नहीं है।

प्रतिस्पर्धा निजी उद्योगों से
भिलाई इस्पात संयंत्र में उत्पादन का करीब 22 फीसदी लेबर कॉस्ट में चला जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह नियमित कर्मियों को मिलने वाली मोटी सैलरी को माना जा रहा है। साल के अंत तक प्रबंधन इसे 15 फीसद के आसपास लाने की कोशिश कर रहा है। जिसके लिए नियमित पद पर नई भर्तियों को करने से गुरेज किया जा रहा है। बीएसपी के तात्तकालीन सीईओ एम रवि ने इस बात को तब कहा था जब यूआरएम से उत्पादन शुरू किया जा रहा था। उन्होंने कहा था कि केंद्रीय इस्पात मंत्री की मंशा के मुताबिक एक्सपांशन के बाद लेबर कॉस्ट में आने वाले खर्च में करीब 7 फीसदी तक कटौती नजर आएगी। जिससे लेबर कॉस्ट घटकर महज 15 फीसदी रह जाएगा।

उत्पादन बढ़ा, कर्मियों की संख्या घटी
बीएसपी का उत्पादन जिस समय 4 मिलियन टन प्रतिवर्ष था, उस समय नियमित कर्मियों की संख्या 65 हजार थी। अब बीएसपी के हॉट मेडल का उत्पादन 7.5 मिलियन टन हो गया है, तब नियमित कर्मियों की संख्या घटकर 18,400 के आसपास पहुंच चुका है। इस तरह से करीब 60 फीसदी कर्मियों की संख्या कम हो चुकी है। बीएसपी में रिक्त पदों की संख्या को खत्म किया जा रहा है। जितने कार्मिकों ने स्वेच्छा सेवानिवृत्ती ली है, उनके पद पहले ही समाप्त किए जा चुके हैं। रिक्त पदों को भी धीरे-धीरे प्रबंधन खत्म कर रहा है।

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