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सरकार ने तो मुफ्त में दे दी गैस कनेक्शन, इस महंगाई में रिफिलिंग कैसे कराए, इसलिए जला रहे चूल्हा

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन का वितरण किया जा रहा है, लेकिन लोगों द्वारा गैस रिफलिंग कराने में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई जा रही है।

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Ujjwala Yojana

राजनांदगांव/खैरागढ़. शासन द्वारा प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत पूरे ब्लाक में गैस कनेक्शन का वितरण तो किया जा रहा है, लेकिन लोगों द्वारा कनेक्शन लेने के बाद गैस रिफलिंग कराने में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई जा रही है। शासन की उज्जवला योजना के तहत ब्लाक स्तर पर ग्रामीण तथा नगर पालिका अंतर्गत 2011 के बीपीएल सर्वे सूची के अनुसार पात्र हितग्राहियों को महज 200 रुपए में गैस कनेक्शन दिया जा रहा है।

लोगों का उज्जवला योजना सें मोह भंग
शुरुआत में लोगों ने इसमें उत्साह भी दिखाया, लेकिन टंकी को रिफिलिंग कराने में बड़ी रकम अब हितग्राहियों को खलने लगी है। गैस खत्म हो जाने के बाद टंकी को दोबारा रिफिलिंग कराने के लिए हितग्राहियों को वर्तमान में ८०० रुपए से अधिक का खर्च उठाना पड़ रहा है। यही कारण है कि लोगों का उज्जवला योजना सें मोह भंग हो रहा है और लोगों द्वारा फिर सें चूल्हे का इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्लाक में अगस्त माह से उज्जवला योजना के तहत हितग्राहियों को गैस कनेक्शन का वितरण चालू कर दिया गया था। ब्लाक को २१ हजार गैस कनेक्शन वितरण करने का लक्ष्य मिला है। जिसमें ब्लाक के शहर एवं ग्रामीण ईलाकों में १३०७८ गैस कनेक्शन अब तक वितरण किया जा चुका है।

20 से 30 किलोमीटर की दूरी तय करके गैस रिफिलिंग

शहर में स्थित एक मात्र सेंटर से ही सिलेंडरों की रिफलिंग हो पाती है, जिसके कारण दुरस्त इलाकों में बसे गातापार, जालबांधा, शेरगढ़, अतरिया, ठेलकाडीह सहित मुढ़ीपार के लोगों को २० से ३० किलोमीटर की दूरी तय करके गैस सिलेंडर रिफिलिंग कराने आना पड़ता है, जिससे उन्हें ८०० रू से अधिक का सिलेंडर और उसमें वाहन का किराया जोड़कर अधिक खर्च का भुगतान करना पड़ रहा है।

कमाई से अधिक रिफिलिंग में खर्च
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत लोगों को गैस कनेक्शन का वितरण तो किया जा रहा है, लेकिन गरीब परिवारों द्वारा इसका उपयोग ज्यादा से ज्यादा चाय बनाने के लिए ही किया जा रहा है। लोगों का यह मानना है कि यदि रोजाना गैस का अधिक उपयोग करने से सिलेंडर जल्द खत्म हो जाएगी और उसे भरवाने के लिए उन्हें ८०० रुपए से अधिक का खर्च उठाना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है योजना के शुरू होने के दौरान सिंलेडर की कीमत ७२० थी। सालभर में कीमत में १०० रुपए से अधिक का इजाफा हो चुका है। ऐसे में गरीब परिवारों को जितनी कमाई नहीं उससे ज्यादा रिफिलिंग में खर्च बैठ रहा है। एक गरीब परिवार के लिए प्रति माह ८०० रुपए रिफलिंग में खर्च कर पाना मुश्किल हो रहा है।

हर माह रिफिलिंग नहीं हो रही

खाद्य अधिकारी नरेन्द्र वाहने ने बताया कि इस तरह की शिकायत नहीं है। जिन्हें सिलेंडर भराना है, वे नियमित पहुंच रहे हैं। उपयोग के आधार पर कई हितग्राहियों द्वारा कम उपयोग किए जाने के कारण हर माह रिफिलिंग नहीं हो रही है।

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