
दुर्ग . 78 करोड़ से बने 42 एमएलडी के फिल्टर प्लांट को निगम के अनट्रेंड कर्मचारी चला रहे हैं। फिल्टरेशन से लेकर सप्लाई तक पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड प्लांट में एक्सपर्ट तो दूर एक भी टेक्नीकल कर्मचारी नहीं है। वृहद पेयजल योजना फेज-टू के तहत शहर की वर्ष 2039 तक की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 77 करोड़ 95 लाख से साइंस कॉलेज के सामने 42 एमएलडी का फिल्टर प्लांट बनाया गया है। निर्माण पूरा कर टेस्टिंग के बाद पीएचई विभाग ने पिछले साल मई में नगर निगम को प्लांट हेंडओवर कर दिया था।
सालभर में नहीं कर पाए भर्ती
इस बीच करीब सालभर में नगर निगम एक भी एक्सपर्ट व टेक्नीकल कर्मचारी की भर्ती नहीं कर पाया। इसकी जगह पीएचई के पुराने डेली वेजेस कर्मचारियों की निगरानी में निगम के दैनिक वेतनभोगियों से काम चलाया जा रहा है। निगम ने प्लांट संचालन के लिए ऐसे 19 कर्मचारी रखे हैं।
फाल्ट आया तो नहीं कर पाएंगे मेंटेनेंस
पहले प्लांट का संचालन पीएचई के एक्सपर्ट इंजीनियर कर रहे थे। केवल लेबर वर्क के लिए बाहरी कर्मचारी रखे गए थे। ये कर्मचारी मोटर जलने व लिकेज मरम्मत करते थे। अब ये अनट्रेंड कर्मचारी प्लांट चला रहे हैं। ऐसे में फाल्ट आया तो मेंटेनेंस भी नहीं हो पाएगा।
अब निजी हाथों में देने की तैयारी
फिल्टर प्लांट का पूरा सिस्टम अभी नया है। जैसे-जैसे सिस्टम पुराना होगा व पेयजल सप्लाई का दबाव बढ़ेगा फाल्ट का खतरा भी बढेगा। दूसरी ओर निगम के पास एक भी एक्सपर्ट नहीं है। शासन भी पद नहीं दे रहा।इसलिए प्लांट को निजी हाथों में देनी की तैयारी की जा रही है।
केवल 18 एमएलडी पानी की सप्लाई
42 एमएलडी प्लांट से अभी केवल 18 एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है। आउटर इलाकों के पाइप लाइन अभी प्लांट से नहीं जुड़ पाए हैं, वहीं भविष्य में प्लांट से 44 हजार घरों में नए नल कनेक्शन देने की योजना है। ये काम पूरे हो जाने के बाद प्लांट से 42 एमएलडी पानी की सप्लाई की जरूरत पड़ेगी।
निगम चलाने योग्य कर्मचारी नहीं
जलगृह प्रभारी देवनारायण चंद्राकर ने बताया प्लांट पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड है, इन्हें चलाने के लिए निगम के पास एक्सपर्ट कर्मचारी नहीं है। जो कर्मचारी काम कर रहे हैं वे बड़े फाल्ट मेंटेनेंस नहीं कर पाएंगे। इसलिए प्लांट को निजी हाथों में देने पर विचार किया जा रहा है।
Published on:
12 Apr 2018 09:16 pm
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