
भिलाई. नीट की तैयारी कर रहे ट्विनसिटी के चार दोस्तों ने बड़े ही भावनात्मक लहजे में राज्यपाल को पत्र लिखा है। पत्र में, सर... राज्य के बच्चे भी काबिल हैं, डॉक्टर बनने की लगन में कोई कमी नहीं करते। जी तोड़ मेहनत के बूते अपना मुकाना पाना चाहते हैं, लेकिन जीत के करीब पहुंचते ही उम्मीद तोड़ दी जाती है। हमारी सीटों पर बाहरी राज्यों के विद्यार्थी अपना कब्जा जमाते हैं। प्लीज... राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों से मैनेजमेंट कोटे की प्रथा समाप्त करा दीजिए...। महाराष्ट्र और मप्र ने अपने होनहारों को पहले मौका देने की ठानी है, पहल छत्तीसगढ़ करे तो हमें भी अपनी मंजिल मिलेगी।
कौन हैं ये चार दोस्त
ये चारों दोस्त शिखर तिवारी, शौर्य गोलछा, आकाश सोनवानी और अमरजीत कुमार है, जिन्होंने राज्यपाल से गुजारिश की है। वे बताते हैं कि एमबीबीएस की सीटों के लिए काउंसलिंग चल रही थी। हर एक छात्र इस बात की उत्सुकता में था कि कौन सा मेडिकल कॉलेज उसकी जिंदगी बदलेगा। हम भी इसी उम्मीद के साथ काउंसलिंग का हिस्सा बने थे, लेकिन ३५० के आसपास अंक लाकर भी सपना पूरा नहीं हो पाया। हमारे देखते ही देखते दूसरे राज्यों के विद्यार्थी मैनेजमेंट कोटे की सीट में प्रवेश ले गए। आंखों में आंसू थे, लेकिन सब्र कर लिया। ये सब इसलिए हुआ क्योंकि सभी राज्यों ने अपने विद्यार्थियों को प्राथमिकता देना जरूरी समझा, जबकि हमारे राज्य ने हमारा तिरस्कार किया। ऐसा नियम ही नहीं बनाया, जिसमें सभी सीटें पहले राज्य के विद्यार्थियों को मिले बाद में बाहरी आएं। चारों दोस्त एक बार फिर नीट की तैयारी में जुटे हैं।
क्यों पड़ी इस पत्र की जरूरत
नीट की परीक्षा के बाद राज्यों ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया। दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों को प्रवेश देने पर रोक लगाई। मैनेजमेंट कोटे पर भी राज्य के ही विद्यार्थियों को फायदा पहुंचाने की नीति बनाई। कुछ राज्यों ने तो मैनेजमेंट कोटे को समाप्त तक कर दिया। छत्तीसगढ़ ही ऐसा राज्य है जो एबीबीएस की सीटों के लिए मैनेजमेंट कोटे के नियम में संशोधन नहीं कर पाया।
हमारे पास मैनेजमेंट कोटे की कितनी सीटें
प्रदेश में शंकराचार्य मेडिकल, चंदूलाल चंद्राकर और रिम्स है। इन सभी के पास एबीबीएस की १५० सीटें हैं। इस साल रिम्स में दाखिले पर रोक रही। शंकराचार्य और चंदूलाल की ३०० सीटों में से १२८ सीटें तो स्टेट कोटे से भरीं गईं लेकिन १२६ पर मैनेजमेंट कोटे से बाहरी राज्यों से आए विद्यार्थियों ने कब्जा जमाया। ४६ सीटें एनआरआई कोटे से भरी गई। जिसे बाद में मर्ज कर दिया गया।
कोटा हटा तो फीस भी बढऩा तय
डीएमई रायपुर डॉ. अशोक चंद्राकर ने बताया कि राज्य में मैनेजमेंट कोटे को समाप्त नहीं किया जा सकता। हमारे कॉलेजों की फीस अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम है। यदि मैनेजमेंट कोटे को समाप्त किया गया तो कॉलेज सरवाइव नहीं कर पाएंगे। यहां तो कॉलेज फीस बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन नियामक ने फैसला नहीं दिया है। यदि मैनेजमेंट कोटा हटा तो फीस भी बढऩा तय हो जाएगा। जहां तक नियम बदलने का सवाल है तो ये सरकार पर निर्भर करता है।
Published on:
19 Nov 2017 01:24 pm

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