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प्रदेश के 2500 सरकारी स्कूलों की बदलेगी सूरत, मरम्मत के लिए 550 करोड़ का बजट मंजूर

प्रदेश में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों में पढ़ रहे लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने बजट घोषणा 2026-27 के तहत राज्य के 2500 से अधिक विद्यालयों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का मास्टर प्लान तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 550 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। राज्य […]

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2500 government schools in the state will be transformed, a budget of Rs 550 crore approved for their repair.

2500 government schools in the state will be transformed, a budget of Rs 550 crore approved for their repair.

  • जर्जर भवनों को मिलेगी प्राथमिकता, हर विधानसभा से चुने जाएंगे 25 स्कूल
  • स्ट्रक्चरल सेफ्टी पर रहेगा फोकस

प्रदेश में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों में पढ़ रहे लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने बजट घोषणा 2026-27 के तहत राज्य के 2500 से अधिक विद्यालयों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का मास्टर प्लान तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 550 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। राज्य परियोजना निदेशक अनुपमा जोरवाल ने इस संबंध में सभी अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर प्रस्ताव मांगे हैं। परिषद की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से 25-25 विद्यालयों की सूची मांगी गई है। खास बात यह है कि इस बार केवल रंग-रोगन या सजावट (सौंदर्यकरण) के नाम पर बजट नहीं मिलेगा, बल्कि प्राथमिकता उन स्कूलों को दी जाएगी जिनके भवन संरचनात्मक रूप से कमजोर हैं और भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

चयन के लिए ये होंगे मुख्य मापदंड

स्कूलों की सूची तैयार करने के लिए विभाग ने 5 कड़े मानक तय किए हैं। ऐसे स्कूल जो मरम्मत के अभाव में जर्जर हैं या जिनसे दुर्घटना का भय है। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक है, उन्हें वरीयता मिलेगी। जिन स्कूलों में कक्षाओं के लिए कमरों का भारी अभाव है। भवन कम से कम 10 वर्ष पुराना होना चाहिए और मरम्मत की राशि निर्माण लागत के 60 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। केवल दिखावे के बजाय 'स्ट्रक्चरल सेफ्टी' यानी भवन की मजबूती को मुख्य आधार बनाया जाएगा।

तकनीकी सर्वे के बाद ही जारी होगा फंड

विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावों को केवल कागजी आधार पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल का तकनीकी सर्वेक्षण और भौतिक सत्यापन किया जाएगा। समय सीमा के भीतर प्रस्ताव मिलने के बाद परिषद कार्यालय की ओर से बजट जारी करने की अग्रिम कार्रवाई शुरू की जाएगी। परिषद ने स्पष्ट किया है कि प्रस्ताव तकनीकी सर्वेक्षण और भौतिक सत्यापन के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में भेजे जाएं, ताकि शीघ्र स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ कराया जा सके। इस निर्णय से प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

एक्सपर्ट व्यू

इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों के उन पुराने स्कूलों को नया जीवन मिलेगा जो लंबे समय से बजट के अभाव में उपेक्षित थे। स्ट्रक्चरल सेफ्टी पर फोकस करने से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।