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क्वार्ट्ज और फेल्सपार को माइनर मिनरल की सूची से हटाने के बाद से प्रदेश का उद्योग संकट में

राजस्थान के एमएसएमइ सेक्टर और सिरेमिक इंडस्ट्री पर संकट केंद्र सरकार की ओर से क्वार्ट्ज, फेल्सपार, माइका और बेराइट्स जैसे खनिजों को माइनर मिनरल (लघु खनिज) की श्रेणी से बाहर करने के बाद से राजस्थान के खान मालिकों और उद्यमियों की नींद उड गई है। इससे जुड़े उद्योगों में तालाबंदी की स्थिति उत्पन्न हो गई […]

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The state's industry is in trouble after quartz and feldspar were removed from the list of minor minerals.

The state's industry is in trouble after quartz and feldspar were removed from the list of minor minerals.

राजस्थान के एमएसएमइ सेक्टर और सिरेमिक इंडस्ट्री पर संकट

केंद्र सरकार की ओर से क्वार्ट्ज, फेल्सपार, माइका और बेराइट्स जैसे खनिजों को माइनर मिनरल (लघु खनिज) की श्रेणी से बाहर करने के बाद से राजस्थान के खान मालिकों और उद्यमियों की नींद उड गई है। इससे जुड़े उद्योगों में तालाबंदी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

नीति आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल

केंद्रीय खान मंत्रालय के अनुसार 20 फरवरी 2025 की अधिसूचना और नीति आयोग की समिति रिपोर्ट 4 नवंबर 2024 में क्वार्ट्ज, फेल्सपार, माइका और बेराइट्स जैसे खनिजों को पेगमाटाइट चट्टानों में पाए जाने वाले लिथियम, टैंटलम और टाइटेनियम जैसे क्रिटिकल मिनरल्स का स्रोत बताया गया है। जबकि क्वार्ट्ज और फेल्सपार कम कीमत वाले औद्योगिक खनिज हैं, जो सिरेमिक उद्योग की रीढ़ हैं। इन्हें रणनीतिक खनिजों के साथ जोड़कर जटिल नियम लागू करना व्यवहारिक नहीं है।

राजस्थान की बादशाहत पर खतरा

देश के कुल क्वार्ट्ज और फेल्सपार उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा है। राजस्थान के बाद आंध्र प्रदेश का नंबर दूसरा आता है। जीएसआई की ओर से इन खनिजों की उपलब्धता और व्यावसायिक व्यवहार्यता की जांच अभी प्रक्रियाधीन है, ऐसे में अंतिम निर्णय लेना जल्दबाजी वाला कदम है।

यह होगा सबसे बड़ा खतरा

यदि ये खनिज माइनर से मेजर या क्रिटिकल श्रेणी में जाते हैं, तो इनके खनन की लीज प्रक्रिया बेहद जटिल हो जाएगी। भारी रॉयल्टी और कड़े केंद्रीय नियमों के कारण छोटे खान मालिकों के लिए काम करना नामुमकिन हो जाएगा। इसका सीधा असर राजस्थान के छोटे उद्योगों पर पड़ेगा। खनिज उद्यमियों के लिए सबसे बड़ा खर्चा माइनिंग प्लान में 5 से 10 गुना तक बढ़ जाएगा। माइनिंग प्लांन के आधार पर उत्पादन नहीं होता है तो स्टार रैकिंग के प्रावधान के आधार पर खनन कार्य बंद हो सकता है। राजस्थान में बारिश के मौसम में अधिकांश खदाने 5 से 6 माह के लिए बंद रहते हैं। अगर स्टार रैंकिंग में कमी आती है तो वह खदान बंद हो जाएगी। वही आईबीएम में हर माह भरे जाने वाले मासिक रिटर्न में देरी होने पर 5 हजार रुपए प्रतिदिन की पैनल्टी तक का प्रावधान है।

खदान मालिकों को मिले अंतिम अवसर

द राजपूताना माइन ऑनर्स एंड मिनरल मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरवी माहेश्वरी का कहना है कि केंद्र सरकार अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले खान मंत्रालय खान मालिकों को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दे। यह केवल खनिजों का मामला नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के रोजगार और राजस्थान के औद्योगिक अस्तित्व का सवाल होगा। इस मामले में एसोसिएशन केंद्रीय खान मंत्रालय को भी पत्र लिखा है।