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बीलिया रीको व दीनदयाल क्षेत्र के सभी उद्योग चलेंगे

बिलिया खुर्द व पुर रोड़ में केवल अनुमत उद्योग चलाने की अनुमति

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All the industries of Belia Rico and Deendayal region will run in bhilwara

All the industries of Belia Rico and Deendayal region will run in bhilwara

भीलवाड़ा .

राज्य सरकार की ओर से ५ मई को जारी आदेश की पालना में सोमवार में जिला कलक्टर व मजिस्ट्रेट राजेन्द्र भट्ट ने आदेश जारी कर कुछ उद्योगों को चलाने की छूट दी है। आदेश में शहरी सीमा में लागू निषेधज्ञा में आंशिक छूट प्रदान करते हुए बिलियां रीको औद्योगिक क्षेत्र एवं दीनदयाल उपाध्याय अविकसित औद्योगिक क्षेत्र के सभी प्रकार के उद्योग चल सकेंगे। जबकि बिलिया खुर्द व पुर रोड में अनुमत उद्योगों (कपड़ा उद्योग शामिल नहीं) के संचालन की अनुमति जारी की है। उद्योग संचालकों को सरकार की ओर से कोरोना संक्रमण से बचाव सम्बन्धी जारी सभी निर्देशों का पालन करना होगा। इस आदेश के तहत कलक्टर ने जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबन्धक को उद्योग के संचालन के लिए अपने स्तर से कार्मिकों व श्रमिको तथा वाहनों के लिए अनुमति प्रदान कर सकेंगे।
सुबह ७ से शाम ७ बजे तक मिलेगी छूट
रीको औद्योगिक के सभी उद्योग सुबह ७ से शाम ७ बजे तक चल सकेंगे। उद्यमी उद्योग को २४ घंटे में दो या तीन शिफ्ट चलाना चाहता है तो श्रमिकों को शाम सात बजे से सुबह ७ बजे तक अपने परिसर में ही रखना होगा। बाहर निकालने पर कफ्र्यू का उल्लंघन माना जाएगा। श्रमिक को अपने वाहनों से लाना व छोडऩा होगा। बिलिया खुर्द व पुर रोड के कपड़ा उद्योग नहीं चलेंगे। उद्यमियों को २ मई को राज्य सरकार के जारी आदेशों की पालना करनी होगी।
विपुल जानी, महाप्रबन्धक जिला उद्योग केन्द्र
श्रमिक को रखना मुश्किल
२० मार्च से बन्द उद्योगों को चलाने की अनुमति जारी करने के आदेश का अध्ययन कर रहे है। श्रमिक को रात के समय औद्योगिक परिसर में रखना मुश्किल है। श्रमिक शहर की चारो दिशाओं में रहते है। उनके के लिए क्या रहेगा। यह मंगलवार को ही तय हो सकेगा। बिलिया खुर्द में कई उद्योग है उसके बारें क्या होगा यह अभी तय नहीं है। श्रमिकों को लाना व छोडऩा भी मुश्किल कार्य है।
रमेश अग्रवाल, सचिव सिन्थेटिक्स विविंग मिल्स एसोसिएशन
कड़ी से कड़ी को जोडऩा होगा
सरकार ने ५ मई को ही उद्योगों को चलाने के लिए आदेश जारी कर दिए थे। इसके लिए सबसे पहले टेक्सटाइल मार्केट, परिवहन सुविधा उपलब्ध करानी होगी। कपड़ा बनाने के लिए कच्चा माल भी लाना होगा। छोटी इकाईयों में श्रमिकों को रखनी व्यवस्था नहीं है। लॉकडाउन के दौरान से अब तक हजारों श्रमिक अपने गांव जा चुके है।
आरके जैन, सचिव मेवाड़ चैम्बर ऑफ कामर्स

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