
External forces tried to change Indian culture: Bagde
Bhilwara news : राजस्थान वीरों व शौर्य की भूमि है। यहां पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप जैसे शासक हुए, जिनकी वीर गाथाओं का भारतीय इतिहास में वर्णन है। प्राचीन काल में दुनिया भर से विद्यार्थी नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ने आते थे। केंद्र सरकार नालंदा को फिर वहीं स्थान दिलाने की कोशिश कर रही है। यह बात राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने यहां 'वैश्विक संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा, अंतर्दृष्टि और नवाचार' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर कही।
राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन भारत के नक्शे को देखे तो यह विशाल देश था। फिर कुछ देश अलग हो गए। अब जो भारत है, उस जैसी शानदार संस्कृति, ज्ञान व गौरवमयी इतिहास अन्य किसी देश में नहीं मिलते। यहां रामायण व महाभारत का काल खंड रहा है। सातवीं सदी तक प्रवासी ही भारत आते थे, लेकिन आठवीं शताब्दी में लोग आने लगे और लूटपाट करने लगे। हमारी संस्कृति, शिक्षा, परम्परा व देव धर्म का हास होने लगा। यहां गौतम बुद्ध व भगवान महावीर हुए। उन्होंने धर्म का प्रचार किया। बाहरी ताकतों ने संस्कृति बदलने का प्रयास किया। बागड़े ने स्वामी विवेकानंद, विनोबा भावे, महात्मा गांधी के संदेशों का उल्लेख किया।
संभागीय आयुक्त महेश चंद्र शर्मा, जिला कलक्टर नमित मेहता, पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह, कार्यवाहक अतिरिक्त कलक्टर राजकेश मीणा, उपखंड अधिकारी भरत मीणा मौजूद थे। संगोष्ठी संयोजक डॉ. हंसराज सोनी ने आभार जताया। संचालन डॉ. ऋचा अगिरा ने किया।
भारतीय मूल्यों को करें पुनस्र्थापित
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने भारत की विश्वगुरुता पर प्रकाश डाला। कहा-प्राचीन ज्ञान पद्धति का अंगीकार करके भारतीय अस्मिता एवं चेतना को फिर जागृत किया जा सकता है। संगोष्ठियों को बौद्धिक विमर्श से आगे बढ़ाकर भारतीय मूल्यों के पुनर्स्थापन का जरिया बनाने पर बल दिया।
शिक्षा नीति पर विचार
राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर ने शिक्षा में नवाचार व भारतीय सांस्कृतिक विचारों के प्रचार में शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा की। प्राचार्य डॉ. पुष्करराज मीणा ने शाहपुरा के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. पंकज चांडक एवं दिनेश शर्मा ने वॉल ऑफ नॉलेज की जानकारी दी। भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं शिक्षा नीति पर विचार-किया।
होल्कर को पुष्पांजलि
राज्यपाल ने लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इससे पहले राज्यपाल का हैलीपेड पर संभागीय आयुक्त महेशचंद्र शर्मा व कलक्टर नमित मेहता ने स्वागत किया।
तालियां सुन बोले...तो भाषण जारी रखूं
राज्यपाल ने अपने संबोधन की समाप्ति से पहले कहा-मेरा भाषण समाप्त होने का समय हो गया है, लेकिन आपकी तालियां मुझे ऐसा करने से रोक रही है। तालियां की गूंज सुनकर मुझे ऐसा लग रहा है कि भाषण जारी रखूं। इस पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
Published on:
31 Jan 2025 10:57 am

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