
On Sheetla Saptami, gulal flew, colors scattered, pichkaris were used, cold things were eaten
Bhilwara news : शीतला सप्तमी पर्व शुक्रवार को जिले में धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह शीतला माता की पूजा के साथ ही शहर में होली खेलने की धूम शुरू हो गई। गुरुवार को बाजारों में रौनक परवान पर रही। स्टेशन रोड, आजाद चौक, शाम की सब्जी मंडी समेत शहर के प्रमुख बाजारों में दिन भर भीड़ रही। पर्व को लेकर मिठाई एवं नमकीन तथा रंग व पिचकारी की दुकानों पर खरीदारी की भीड़ रही। शहर की कॉलोनियों में भी रंगों व पिचकारियों की दुकानें सज गई है। इधर, शीतला सप्तमी पर्व समेत विभिन्न पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट है। शहर के संवदेनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। थाना पुलिस व कंपनी के जवानों ने भी रूट मार्च किया।
पापड़, चिप्स व नमकीन की मांग
रांदा पोआ की सामग्री खरीदने के लिए शहर के मुख्य बाजारों में दुकानों व स्टालों पर व्यंजनों के ढेरों आइटम सजे हुए थे। लोग पापड़, चिप्स सहित अन्य तलीय कच्ची सामग्री की खरीद की। शहर के आजाद चौक सहित बाजारों में कई जगह सड़कों पर खरीदारी के लिए भीड़ देखी गई। रंग, गुलाल व पिचकारी की दुकानों पर भी इस बार ढेरों नए आइटम होने से बच्चों ने भी जमकर खरीदारी की है। बाजार में भीड अधिक होने से कई बार जाम की स्थिति बनी रही।
रंग व पिचकारी की दुकानों पर भीड़
तलीय सामग्री के अलावा शीतला सप्तमी को रंग खेलने की परम्परा के तहत भीलवाड़ा में रंग व गुलाल के साथ ही पिचकारी, गुब्बारों व अन्य खाद्य वस्तुओं की खरीदारी भी जोरों पर है।
पूजा के बाद खेलेंगे रंग गुलाल
पंडित अशोक व्यास ने बताया कि गुरुवार को रांदा पोआ तैयार किए गए। शीतला सप्तमी 21 मार्च को होगी। महिलाएं शीतला माता की पूजा कर परिवार व घर में सुख-समृद्धि की कामना करेगी। उधर, पुराने भीलवाड़ा स्थित शीतला माता मंदिर को रंगीन लाइटों से सजाया गया है। यहां गुरुवार मध्य रात्रि के बाद से ही महिलाएं पूजा करने आने शुरू गई। शीतला सप्तमी को शीतला सप्तमी, शीतला अष्टमी, ठंडा-बासी, बास्योड़ा और कई नामों से जाना जाता है। इस अनूठे त्योहार पर शुक्रवार को घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाएगा।
800 साल पुराना है मंदिर
शीतला माता की पूजा पुराने भीलवाड़ा के शीतला माता मंदिर में होगी। मंदिर को 800 साल पहले उदयपुर के तत्कालीन महाराणा ने बनवाया था। मंदिर के पुजारी विश्वनाथ पाराशर ने बताया कि महाराणा भोपालसिंह के दादा ने राजस्थान के हर जिले में मंदिर बनवाए। इस मंदिर की सेवा पहले लाला परिवार करते आ रहे थे लेकिन पांच पीढियों से उनका परिवार सेवा कर रहा है। शीतला सप्तमी पर मंदिर में चढऩे वाली सामग्री का अधिकार कुम्हारों का होता है। यह वर्षो पुरानी परम्परा है।
Published on:
21 Mar 2025 10:18 am
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