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बजट 2026: आधी आबादी को ‘पूरी आजादी’, जनधन बनेगा गेमचेंजर

- वर्किंग वुमन के लिए अलग क्रेडिट कार्ड और सस्ता लोन संभव - स्वयं सहायता समूहों के जरिए 'आर्थिक ताकत' बनने की तैयारी

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Major relief expected: Honorarium of 1.16 lakh mid-day meal cooks in the state to be increased

Major relief expected: Honorarium of 1.16 lakh mid-day meal cooks in the state to be increased

केंद्रीय बजट 2026 में मोदी सरकार 'महिला केंद्रित' अर्थव्यवस्था को नया आयाम दे सकती है। इस बार का बजट केवल लोक-लुभावन योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं को 'आर्थिक ताकत' बनाने के लिए वित्तीय समावेशन के सबसे बड़े नेटवर्क जनधन खातों का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को सिर्फ लाभार्थी से बदलकर उद्यमी और निवेशक बनाना है।

महिलाओं के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड

बजट में कामकाजी महिलाओं और महिला उद्यमियों के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड और डिजिटल लोन की सुविधाए मिले। मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया के तहत ब्याज दरों में और रियायत मिलनी चाहिए। जन सुरक्षा योजनाओं के जरिए महिलाओं को सस्ती दरों पर अधिक बीमा कवर देने पर विचार करना चाहिए।

लखपति दीदी से आगे की राह

सरकार का फोकस स्वयं सहायता समूहों को माइक्रो-बिजनेस यूनिट्स में तब्दील करना है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा। 'नमो ड्रोन दीदी' जैसे कार्यक्रमों के लिए बजट आवंटन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है, ताकि तकनीक के क्षेत्र में महिलाएं नेतृत्व कर सकें।

वर्कफोर्स में भागीदारी

वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी 70 प्रतिशत करने का लक्ष्य लेकर चले। इसके लिए बजट में दो मोर्चों पर काम हो सकता है। औद्योगिक क्षेत्रों और मेट्रो शहरों में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास और 'क्रेच' (शिशु गृह) सुविधाओं के लिए विशेष फंड मिलना चाहिए।

महिला उद्यमियों के लिए डिजिटल और फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम, इससे वह ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर अपने उत्पाद को बाजार तक पहुंचा सके। एमएसएमइ के लिए अलग क्रेडिट गारंटी फंड मिले। एसएचजी उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता मिले।

पल्लवी लढा, अध्यक्ष लघु उद्योग भारती महिला इकाई

बजट में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे डिजिटल क्लासरूम, उन्नत लैब्स और बेहतर लाइब्रेरी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दें। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप और वित्तीय सहायता को बढ़ाकर शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो।

- अमिता लोहिया, शिक्षाविद

महिला उद्यमी एग्ज़िबिशन में स्टॉल लगाती हैं तो बड़ी चुनौती अत्यधिक स्टॉल किराया होता है। इससे बिक्री के बावजूद लाभ नहीं बचता। कई महिलाएं घर के मसालों शुद्ध व सात्विक बनाकर रोज़गार पैदा कर रही हैं। अन्य खर्चों के लिए जब आर्थिक सहायता की ज़रूरत पड़ती है।

- रक्षा जैन, उद्यमी

सरकार महिलाओं को सिर्फ़ लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णयकर्ता और निवेशक माने। महिलाएं स्वयं व्यवसाय चला रही हैं, रोज़गार दे रही हैं और जोखिम उठाकर निवेश भी कर रही हैं। बजट में स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग को और मज़बूती मिले, ताकि योजनाएँ काग़ज़ों तक सीमित न रहें।

- डॉ. प्रियांका मेहता, उद्यमी

आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कम ब्याज दर पर लोन का प्रावधान हो। महिला उद्यमियों के लिए अलग से निर्यात प्रोत्साहन योजना के साथ निर्यात संवर्धन योजना मिले। पहली बार निर्यात करने वाली महिलाओं के लिए सब्सिडी, ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय एक्सपो में सरकारी खर्च का प्रावधान करना चाहिए।

- शिखा भदादा, उद्यमी

युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर प्रशिक्षित करें, ताकि वे आधुनिक तरीकों से उद्यमिता अपनाएं। ऑटोमेशन तकनीक पर जागरुकता अभियान चलाकर युवाओं को प्रोत्साहित किया जाए। इससे मशीनरी की दक्षता बढ़े, कम मानव हस्तक्षेप से कपड़े न्यूनतम क्षति के साथ बने और अधिक महत्वाकांक्षी डिजाइन संभव हों।

- ममता चालाना, उद्यमी