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बजट 2026: ‘खैरात’ नहीं ‘खुराक’ की दरकार; क्या आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा गरीब?

-सब्सिडी के बोझ तले दबते बजट के बीच बड़ा सवाल: मुफ्त राशन-गैस से पेट तो भर गया, पर हाथ को काम कब मिलेगा -डीबीटी की सफलता के बाद अब 'रोजगार आधारित विकास' पर टिकी हैं निगाहें

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Budget 2026: What is needed is "nourishment," not "handouts"; will the poor move towards self-reliance?

Budget 2026: What is needed is "nourishment," not "handouts"; will the poor move towards self-reliance?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना 9वां बजट पेश करेंगी। देश के करोड़ों गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों की निगाहें केवल 'मुफ्त योजनाओं' की घोषणाओं पर नहीं, बल्कि 'सशक्तीकरण' के रोडमैप पर होंगी। बीते एक दशक में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने बिचौलियों का खेल खत्म कर करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए की बचत तो की है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अब भी 80 करोड़ लोग मुफ्त राशन पर निर्भर हैं। विशेषज्ञ और आम आदमी पूछ रहे हैं- "सब्सिडी से आगे क्या?" क्या यह बजट गरीब को आत्मनिर्भर बनाने का साहस दिखाएगा।

जमीनी हकीकत: योजनाओं की 'धमक' और 'दिक्कतें'

सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच अभी भी कुछ फासले हैं, जिन्हें पाटना इस बजट की चुनौती होगी। शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक सत्यापन से चोरी तो रुकी है, लेकिन पोषण की गुणवत्ता और समय पर वितरण अभी भी जिले के दूरदराज इलाकों में चुनौती है। प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान तो बन गए, लेकिन बढ़ती निर्माण सामग्री ईंट, सीमेंट, सरिया की कीमतों ने गरीब पर कर्ज का बोझ बढ़ा दिया है। उम्मीद है कि बजट में आवास सहायता राशि में बढ़ोतरी होगी। गैस में डीबीटी से सब्सिडी खाते में आती है, पर 800-1100 रुपए का सिलेंडर आज भी निम्न आय वर्ग की पहुंच से बाहर हो रहा है। रिफिलिंग दर बढ़ाने के लिए ठोस कदम की दरकार है।

फ्री स्कीम्स बनाम रोजगार: असली आत्मनिर्भरता कहां है

चुनावों और लोकलुभावन वादों के दौर में 'मुफ्त की संस्कृति' पर बहस छिड़ी है। लोगों का मानना है कि केवल सब्सिडी से गरीबी दूर नहीं होगी। गरीब युवा को मुफ्त अनाज के बजाय 'काम सीखने' के लिए वजीफा और टूलकिट मिलने चाहिए। छोटे उद्योगों को बिना गारंटी लोन और टैक्स में छूट मिले, ताकि वे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा कर सकें। मनरेगा का नया स्वरूप में केवल 'गड्ढे खोदने' तक सीमित न रखकर कृषि विकास और स्किल मैपिंग से जोड़ा जाए।

मुफ्त राशन जरूरी है, पर मजबूरी नहीं

सरकार मुफ्त गेहूं दे रही है, यह अच्छी बात है। लेकिन मेरे जैसे मजदूर को काम भी तो मिलना चाहिए। अगर शहर में ही पक्का रोजगार हो, तो हम खुद खरीदकर खा सकते हैं। बजट में रोजगार के अवसर बढ़ने चाहिए।

- राजेश चौधरी, अधिवक्ता

मिडिल क्लास और निम्न आय वर्ग के बीच का अंतर कम हो

महंगाई ने निम्न आय वर्ग की कमर तोड़ दी है। टैक्स स्लैब में जो राहत दी गई है, उसका लाभ सबसे निचले स्तर तक नहीं पहुंचता। हमें ऐसी पॉलिसी चाहिए जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य सस्ता हो।

- अंशिका जैन, कार्मिक

उज्ज्वला सिलेंडर का दाम कम हो

गैस कनेक्शन मिल गया, पर रिफिल कराना मुश्किल होता है। सब्सिडी समय पर मिले और सिलेंडर की कीमत 500 रुपए के आसपास स्थिर की जाए, तभी लकड़ी के धुएं से असली आजादी मिलेगी।

- सुशीला जैन, लाभार्थी

छोटे व्यापारियों को मिले प्रोत्साहन

कई लोगों ने पीएम स्वनिधि से लोन लिया है। पर व्यापार बढ़ाने के लिए और मदद की दरकार है। बजट में छोटे कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और बीमा की गारंटी होनी चाहिए।

- अंजलि अग्रवाल, युवती

युवाओं को मिले आत्मनिर्भरता की चाबी

लोगों के पास डिग्री है पर हाथ को काम नहीं। सरकार को स्किल डेवलपमेंट और स्टार्टअप के लिए जिला स्तर पर बड़े सेंटर खोलने चाहिए, ताकि गरीब का बच्चा भी उद्यमी बन सके।

गौतम दुग्गड, युवा