
करोडों के निर्माण कार्य, विकास की कई योजनाएं तथा जनता की ढेरों समस्या
भीलवाड़ा।
करोडों के निर्माण कार्य, विकास की कई योजनाएं तथा जनता की ढेरों समस्या। इसके बावजूद वस्त्रनगरी के विकास एवं नगर नियोजन का जिम्मा संभाल रही दो संस्थाओं नगर परिषद एवं नगर विकास न्यास के बीच तालमेल का अभाव है। एकदूसरे को नजर अंदाज करने और अपना रुतबा बनाए रखने की बढ़ती प्रवृति है। इसी के फेर में शहर में करोड़ों खर्च होने के बावजूद विकास कार्यों को सही दिशा नहीं मिल सकी है।
एेसे में जनता की अधिक मुसीबतें बढ़ी है। दूसरी तरफ शहर की दोनों विकास की धुरी होने के बावजूद राज कोष से खर्च हो रहे करोड़ों की राशि के समुचित उपयोग को लेकर भी गंभीर नहीं है। शिकायतें आम है कि कई हिस्सों में बेवजह निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। अभियंताओं पर ठेकेदार हावी हो रहे है। कार्यालयों में कर्मचारियों पर दलाल हावी है। दोनों ही संस्थाएं शहर के विकास कार्यों को लेकर कितनी गंभीर है और यहां के कर्मी जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर रहे है, राजस्थान पत्रिका के समाचार अभियान 'जागो- शहर की सरकार' के जरिए ये सामने लाया जाएगा।
शहर के बीचोंबीच प्रमुख महावीर पार्क की देखरेख नगर परिषद के पास है। इस पार्क में नगर विकास न्यास ने कुछ विकास करा दिया। इसे लेकर दोनों में ठन गई है। नगर परिषद का कहना है कि पार्क हमारा है इसमें विकास हम कराएंगे। नगर विकास न्यास का तर्क है कि पूरा शहर हमारा है, इसमें हम भी पैसा खर्च कर सकते हैं। यह तो एक उदाहरण मात्र है। जबकि एेसे कई मुद्दे और गंभीर मामले हैं, जिनके कारण नगर परिषद व यूआईटी में बीच विवाद चल रहा है। शहर के विकास का जिम्मा संभालने वाली इन दोनों संस्थाओं के बीच कहीं अपने अधिकारों को लेकर लड़ाई है तो कहीं राजस्व को लेकर। जनता बीच में फंस रही है। सर्किल के विकास का विवाद है तो कहीं कॉलोनी में सड़क बनाने का। कुछ कॉलोनियां एेसी है जिन्हें दोनों संस्थाएं भूल गई है। एेसे में वहां विकास के काम नहीं हो रहे हैं।
राजस्व के लिए करते हैं लड़ाई
स्थिति - नगर विकास न्यास जो भूखंड बेचती है, उसमें से 15 फीसदी राशि नगर परिषद को देना जरूरी है। इस राशि से उस क्षेत्र का मेंटेनेस करना होता है। एक साल से यूआईटी ने परिषद को राशि नहीं दी है। इसे लेकर बार-बार विवाद होता है।
दोनों को चाहिए पॉश कॉलोनी
स्थिति - नगर विकास न्यास ने जिन कॉलोनियों को विकसित कर दिया, उसकी मांग नगर परिषद कर रही है। ताकि उसकी रेवेन्यू परिषद के पास आ सके। इसमें नगर परिषद बापूनगर, आरसी व्यास कॉलोनी, विजयसिंह पथिकनगर की डिमांड कर रहे हैं। अभी लीज व अन्य राजस्व यूआईटी के पास जाता है और सफाई परिषद करती है।
सीमा को लेकर नहीं है स्पष्ट जानकारी
स्थिति - शहर में नगर परिषद एरिया कौनसा है और यूआईटी का कौनसा। इसे लेकर भी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है। लोग इस असमंजस के कारण या तो अतिक्रमण कर लेते हैं या उनके काम नहीं होते हैं। दादाबाड़ी सहित कुछ जगह एेसी है, जहां दोनों संस्थाएं कॉलोनियां विकास कराती है। कई बार एक ही जगह के टेंडर दोनों संस्थाएं लगा देती है। कुछ नक्शे परिषद है, लेकिन निर्माण स्वीकृति यूआईटी दे रही है।
हो रहे अतिक्रमण, कोई देखने वाला नहीं
स्थिति - शहरी क्षेत्र में अवैध निर्माण खूब हो रहे हैं। स्थिति यह है कि नगर विकास न्यास के पास बन रहे एक कॉम्पलेक्स के लिए तो खुद न्यास सचिव ने परिषद को लिखा। इसमें बताया कि निर्माण नियम विरुद्ध हुआ। बाद में इसमें जांच हुई। कई जगह और भी कब्जे हो रहे हैं। सीमांकन नहीं होने से किसकी जमीन पर कब्जा हुआ यह भी किसी को जानकारी नहीं है।
नहीं मिल रहे पट्टे
स्थिति - शहर में स्टेट ग्रांट के पट्टों को लेकर जनता परेशान है। नगर परिषद में आवेदन कर रखा है लेकिन फाइलें यूआईटी से संबंधित है। एेसे में जनता के काम नहीं हो रहे हैं। पट्टे सहित कुछ और भी काम है जो दोनों संस्थाओं की सहमति से ही हो सकते हैं लेकिन अटके हुए हैं।
आपसी विवादों के कारण नहीं होता एका
शहर में नगर परिषद सभापति ललिता समदानी, नगर विकास न्यास अध्यक्ष गोपाल खंडेलवाल, विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी व सांसद सुभाष बहेडि़या सभी भाजपा से हैं। लेकिन आरोप है कि चारों ने कभी एक मंच पर आ कर शहर के विकास पर मंथन नहीं किया। गत दिनों भाजपा संगठन महामंत्री चंद्रशेखर व उप मुख्य सचेतक मदन राठौड़ के समक्ष भी यु मुद्दा उठा था।
Published on:
04 Apr 2018 03:19 pm

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