
जन्मजात विकृति व हृदय की बीमारियों के साथ ही बच्चों को अन्य बीमारियों से निजात दिलाने में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम कारगर साबित
भीलवाड़ा।
जन्मजात विकृति व हृदय की बीमारियों के साथ ही बच्चों को अन्य गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम कारगर साबित हुआ। जुलाई 2017 से मार्च 2018 तक इसके तहत जिले में 1570 आंगनबाड़ी केन्द्रों, 2169 सरकारी विद्यालय, 17 मदरसों में बच्चों का परीक्षण कर उन्हें स्वास्थ्य की जानकारी दी।
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मोबाइल हेल्थ टीम ने कुल 2 लाख 38 हजार 995 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर 13,730 बच्चों को रेफर किया। हृदय विकृति से ग्रसित 33 बच्चों के ऑपरेशन कराए गए। 45 बच्चों के कटे होंठ व तालु, 21 बच्चों के कान बहने, 21 के मुड़े पैर, 9 के जन्मजात कुल्हे की विकृति, 4 के रीढ की हड्डी के ऑपरेशन किए गए। 160 बच्चों को नि:शुल्क चश्मे बांटे गए। कुल 10 हजार बच्चों का उपचार किया गया। राज्य सरकार ने डेन्टल वेन को भी इस कार्यक्रम में शामिल कर दिया, जो हर तीन माह में केम्प लगा रही है। पिछली बार दिसम्बर में इस केम्प में 1403 बच्चों की दन्त चिकित्सा की गई।
3 वर्ष में सवा सात लाख की स्वास्थ्य जांच
कार्यक्रम के तहत जनवरी 2016 से मार्च 2018 तक 7 लाख 22 हजार 316 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 23,690 बच्चों को रेफर किया गया। इनमें 3,618 बच्चों का 33 शिविरों में उपचार किया। 35 बच्चों के हृदय रोग के ऑपरेशन, 45 बच्चों के कटे होंठ व तालु के ऑपरेशन, 21 बच्चों के कान के पर्दे के ऑपरेशन किए गए। तीन साल में कुल 33 बड़े व 108 छोटे ऑपरेशन किए गए। 20 हजार बच्चों का तो स्थानीय जिला अस्पताल व सामुदायिक व प्राथमिक केन्द्रो पर ही उपचार संभव हो गया।
नोडल अधिकारी डॉ. सीपी गोस्वामी ने बताया कि राजकीय चिकित्सालयों में जन्म लेने वाले ० से ६ सप्ताह तक के नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग चिन्हित प्रसव केन्द्रों पर होता है, जहां जन्मजात विकारों की पहचान कर रिकार्ड संधारण, रिर्पोटिंग एवं रेफरल क ी व्यवस्था है। घर पर जन्मे शिशु की 6 सप्ताह तक की स्क्रीनिंग आशा होम विजिट के दौरान करती है। 6 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच आंगनबाड़ी केन्द्रों व 6 से 18 वर्ष तक की जांच विद्यालयों में की जाती है।
Published on:
03 Apr 2018 01:38 pm

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