
शहर के विकास का जिम्मा संभाल रही नगर परिषद और नगर विकास न्यास के बीच नित नए विवाद हो रहे हैं। अब दोनों के बीच उधारी के पैसे को लेकर झगड़ा हो गया है
भीलवाड़ा।
शहर के विकास का जिम्मा संभाल रही नगर परिषद और नगर विकास न्यास के बीच नित नए विवाद हो रहे हैं। अब दोनों के बीच उधारी के पैसे को लेकर झगड़ा हो गया है। परिषद का आरोप है कि न्यास हमको कॉलोनियां विकसित कर सौंप देता है। इसके बाद उनमें झाडू-पोछा, सफाई और विकास हम कराते है।
इसके लिए यूआईटी से राशि दी जाती है। यह राशि लंबे समय से नहीं मिली है। उधर, न्यास का तर्क है कि उसके भूखंड लंबे अर्से से नीलामी नहीं हो रहे हैं। एेसे में उनके पास जो बजट है, उससे उनके रोजमर्रा के काम ? ही हो रहे हैं। एेसे में अब भूखंड बिकेंगे तो ही पैसे दिए जाएंगे। न्यास के बेचे भूखंड की 15 फीसदी राशि परिषद को दी जाती है, जो उस क्षेत्र के विकास में काम आती है।
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यह राशि लंबे समय से बकाया है। न्यास के परिषद को बकाया पैसा नहीं देने से स्थिति खराब है। परिषद को भी बिजली उपकरण खरीदने हैं। स्थिति यह है कि अभी कई कॉलोनियों में अंधेरा है। इनमें बिजली पहुंचाने के लिए सामग्री की जरुरत है। अब राशि मिलने पर व्यवस्था हो सकेगी।
लंबे अर्से से नहीं मिला पैसा, लिखा है पत्र
शहर में झाडू-पोछा और सफाई नगर परिषद करवाती है। इसके बदले यूआईटी से पैसा मांगते हैं। यह पैसा काफी समय से नहीं आया है। हमने पत्र भी लिखा है।
ललिता समदानी, सभापति, नगर परिषद
भूखंड बिकते ही दे देंगे पैसा
&हां, परिषद को पैसा देना है। कुछ समय से भूखंडों की नीलामी नहीं हुई। इस कारण बजट कम है। भूखंड बिकते ही पैसा दे देंगे, पहले भी पैसा समय पर दिया है।
गोपाल खंडेलवाल, चेयरमैन, नगर विकास न्यास
हाल में लिया बकाया लौटाने का प्रस्ताव
चार अप्रेल की न्यास की बोर्ड बैठक में उन्होंने परिषद को इस साल बकाया राशि का प्रस्ताव लिया है। इसमें लिखा है कि परिषद को भूखंड विक्रय के बदले १५ प्रतिशत के रूप में ९३.३१ करोड़ रुपए इस वर्ष देना प्रस्तावित है। अब यूआईटी भूखंडों की बिक्री का इंतजार कर रही है।
Published on:
24 Apr 2018 12:07 pm
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