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खातेदारी भूमि में खान आवंटन नियमों पर विवाद

- आवेदन शुल्क के साथ 40 प्रतिशत प्रीमियम राशि वसूली का विरोध

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Dispute over rules for allotment of mines in khatedari land

Dispute over rules for allotment of mines in khatedari land

ऊपरमाल पत्थर खान व्यवसायी (संघ) सेवा संस्थान बिजौलियां ने खान एवं पेट्रोलियम विभाग द्वारा खातेदारी भूमि में खान आवंटन के लिए लागू किए गए नए नियमों पर कड़ा विरोध जताया है। संस्थान ने विभाग के प्रमुख शासन सचिव को पत्र लिखकर आवेदन शुल्क के साथ 40 प्रतिशत प्रीमियम राशि लेने की बाध्यता को अन्यायपूर्ण बताया और इसे तत्काल संशोधित करने की मांग की।

खान व्यवसायियों की आपत्ति

संस्थान मंत्री रामप्रसाद विजयवर्गीय ने बताया कि खातेदारी भूमि पर आवेदन करने वाले व्यक्ति को सीमांकन के समय सड़क, नाला, वन, सार्वजनिक स्थान जैसी दूरी छोड़नी पड़ती है। इसके कारण आवेदन की गई भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल काफी कम हो जाता है। कई मामलों में सीमांकन और स्कूटनी के बाद आवेदित क्षेत्र घट जाता है। कई बार आवेदन निरस्त भी हो जाता है। ऐसे में पहले ही जमा करवाई गई 40 प्रतिशत प्रीमियम राशि का क्या होगा, इस पर विभाग ने स्पष्टता नहीं दी है। विजयवर्गीय ने कहा कि विभाग को चाहिए कि वह प्रीमियम राशि तभी ले, जब आवेदक के पक्ष में एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी हो। आवेदन के समय ही भारी-भरकम राशि जमा करवाने की बाध्यता से खातेदारी भूमि में आवेदनों की संख्या में भारी कमी आएगी।

राजस्व पर असर

व्यवसायियों का कहना है कि यदि यह नियम यथावत रहा तो विभाग को अपेक्षित आवेदन नहीं मिल पाएंगे और राज्य सरकार को राजस्व में नुकसान होगा। संस्थान ने खान निदेशक व प्रमुख शासन सचिव से आग्रह किया कि आवेदन प्रक्रिया को सरल व व्यावहारिक बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग आवेदन कर सकें और सरकार को भी लाभ मिल सके।

खनन व्यवसायियों की मांग

  • आवेदन के समय केवल आवेदन शुल्क ही लिया जाए।
  • प्रीमियम राशि की वसूली एलओआई जारी होने के बाद ही की जाए।
  • नियम में संशोधन से सरकार को ज्यादा आवेदन व राजस्व प्राप्त होगा।

यह है विवाद

  • विभाग: आवेदन के साथ 40 प्रतिशत प्रिमियम राशि अनिवार्य।
  • व्यवसायी: आवेदन निरस्त होने पर राशि अटक जाएगी।