भीलवाड़ा. दिगम्बर आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंध सोमवार को अजमेर रोड से विहार करते हुए शाहपुरा तिराहे से पहले स्थित एनसी जैन के फार्म हाउस पर प्रवेश किया। उनके साथ कई जैन मुनि व जैन साध्विया विहार कर रही है।
आचार्य का यहां से मांडल, बागोर, गंगापुर होते हुए उदयपुर जाने का कार्यक्रम है। आचार्य को भीलवाड़ा शहर में लाने के लिए पिछले कई दिनों से सकल दिगम्बर जैन समाज लगा हुआ था। लेकिन उदयपुर में होने वाले पंचकल्याणक के कार्यक्रम को लेकर वे निर्धारित समय से पूर्व वहां प्रवेश करना चाहते है।
महाराज सोमवार शाम को 5 बजे एक टेक्सटाइल उद्योग से विहार करते हुए करीब साढ़े चार किलोमीटर तक पदविहार करते हुए एनसी जैन के फार्म हाउस पहुंचे है। आचार्य के वहा पहुंचने पर एनसी जैन, चन्दा देवी जैन, अभिषेक जैन, नमिता जैन, सुभी व शुभ जैन, सुभाषनगर व बापूनगर मंदिर ट्रस्ट के सदस्य बाहुबली जैन वेलफेयर सोसायटी, आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, आदिनाथ जिन मंडल, आदिनाथ नवयुवक मंडल, आदिनाथ महिला मंडल तथा जैन सोशल ग्रुप, सकल दिगम्बर जैन समाज, विभिन्न कॉलोनियों के पदाधिकारियों ने अगवानी की। आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन एनसी जैन के परिवारजनो ने किया।
इस दौरान आचार्य वर्धमान सागर ने कहा कि भीलवाड़ा छोटे से बड़ा हो गया है। 40 साल में भीलवाड़ा शहर ने काफी विकास किया है। आप-पास के लोग भी गांवों से आकर यहां बस गए है। पहले यहां तीन मंदिर थे लेकिन अब 18 मंदिर है। भीलवाड़ा में कपड़े की कई इकाईयां संचालित है। भीलवाड़ा अब कई कॉलोनियों में बट गया है। आचार्य ने कहा कि संसार का प्राणी सुख चाहता है। इसके लिए कई प्रकार के जतन करता है। इसके लिए दिन भर दौड़ लगाता रहता है। जबकि सुख का खजना तीन स्थानों पर है। पहला धर्म, जिन्होंने धर्म धारण किया वह सभी सुखी है। दूसरा मंदिर, जहां भगवान विराजमान है। यदि सुख चाहते है तो दिगम्बर मुद्रा में आ जाए। स्वयं के सुख के लिए कई भौतिक साधनों को अपनाया है। यह मनुष्य की सोच है कि जितने भौतिक साधन होंगे तो हम उतने सुखी होंगे। लेकिन यह सब दुख का कारण है। भौतिक साधन के कारण लोग गांव को छोड़कर शहर में आ गए है। धर्म, धर्मात्मा और आचरण इन तीनों को अपनाना होगा। आचार्य ने कहा कि भीलवाड़ा वालों को लगता है कि पुण्य में कुछ कमी रह गई है तो अभी से भक्ति करनी होगी। वे राजस्थान में कई सालों बाद आए है। अभी जाने वाले नहीं है। एनसी जैन ने बताया कि रात्रिविश्राम के बाद मंगलवार सुबह यहां से मांडल की ओर विहार किया। आहारचर्या आशीर्वाद वाटिका में हुआ।