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बजरी माफिया का प्रशासन को चैलेंज: जब्त स्टॉक पर भी भारी ‘चोरी’

- बेखौफ हौसले: भीलवाड़ा व बेगूं में हजारों टन जब्त बजरी डकार गए माफिया -खनिज विभाग ने सुरक्षा से हाथ खींचे, अब नीलामी ही एकमात्र विकल्प -निगरानी के अभाव में खनिज विभाग पस्त

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Gravel mafia challenges the administration: Massive 'theft' even from seized stock.

Gravel mafia challenges the administration: Massive 'theft' even from seized stock.

सुरेश जैन

बजरी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे पुलिस और खनिज विभाग की ओर से जब्त किए गए स्टॉक को भी चुराने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रशासन की मेहनत पर माफिया पानी फेर रहे हैं, इसके कारण अब अधिकारियों ने बजरी जब्त करने से ही हाथ खींचना शुरू कर दिया है। ताजा मामला बेगूं और भीलवाड़ा क्षेत्र का है, जहां हजारों टन जब्त बजरी माफियाओं के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर दोबारा बाजार में पहुंच गई और विभाग मूकदर्शक बना रहा। बजरी के मामले में कार्रवाई करने से विभाग उस समय हाथ खींच रहा है जब प्रदेश में मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

केस-1: भीलवाड़ा में 5 हजार टन बजरी पार

भीलवाड़ा जिले के बिजौलियां क्षेत्र में खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 2500 टन बजरी जब्त की थी, लेकिन नीलामी प्रक्रिया से पहले ही माफिया उसे उठा ले गए। यही हाल बड़ाखेड़ा का है, जहां 3500 टन बजरी चोरी हो चुकी है। अधिकारियों का तर्क है कि नीलामी प्रक्रिया में 3 माह का समय लगता है, इतनी लंबी अवधि तक स्टॉक की रखवाली के लिए न तो स्टाफ है और न ही होमगार्ड उपलब्ध कराए जाते हैं।

केस-2: बेगूं में अधिकारी ने कार्रवाई से किया इनकार

बेगूं थाने के पास लीरड़ी गांव में करीब 100 टन अवैध बजरी का स्टॉक पाया गया। लेकिन खनिज कार्यदेशक आवेश माथुर ने इसे जब्त करने से यह कहते हुए मना कर दिया कि इसकी निगरानी संभव नहीं है। मामला जिला कलक्टर तक पहुंचा, जिसके बाद आनन-फानन में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर बजरी जब्त की गई। गौरतलब है कि इसी गांव में 6 महीने पहले जब्त की गई बजरी मौके से गायब हो चुकी है।

विभागीय बेबसी: ये हैं बड़ी चुनौतियां

  • स्टाफ की कमी: जब्त बजरी के ढेरों की 24 घंटे निगरानी के लिए विभाग के पास पर्याप्त अमला नहीं है।
  • लंबी प्रक्रिया: जब्ती से लेकर नीलामी तक करीब 90 दिन का समय लगता है, जो माफियाओं को चोरी का मौका देता है।
  • लावारिस स्टॉक: अवैध स्टॉक का कोई मालिक सामने नहीं आता। इससे अधिकारी कार्रवाई करने से बचते हैं।

डीएमएफटी फंड से मिले वाहन

खनिज विभाग के अधिकारी का कहना है कि जब्त बजरी की निगरानी बड़ी समस्या है। तीन महीने तक सुरक्षा कौन करेगा? डीएमएफटी फंड से वाहन खरीदकर बजरी को नजदीकी थानों में रखवाना या मौके पर तुरंत नीलामी करना ही समाधान हो सकता है। लेकिन इसके लिए सरकार को निर्णय करना होगा।

समाधान के तीन बड़े सुझाव

  • लीज धारकों की जिम्मेदारी: जब्त बजरी को पास के वैध लीज धारक को सौंप दिया जाए या उसकी रॉयल्टी जमा कर उसे उठाने के लिए पाबंद किया जाए।
  • थाने में सुरक्षित भंडारण: डीएमएफटी फंड से डंपर और मशीनरी किराए पर लेकर जब्त स्टॉक को सुरक्षित पुलिस थानों के परिसर में डाला जाए।
  • स्पॉट ऑक्शन: बजरी जब्ती के तुरंत बाद मौके पर ही नीलामी कर उसका निस्तारण किया जाए ताकि माफिया को मौका न मिले।