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खाड़ी युद्ध का असर: मोरबी में गैस सप्लाई ठप, गंगापुर का खनिज उद्योग पूरी तरह बंद के कगार पर

सैकड़ों इकाइयां व खदान सूनी, हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट, थमे ट्रकों के पहिए

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Impact of the Gulf War: Gas supply halted in Morbi; Gangapur's mineral industry on the verge of a complete shutdown.

खाड़ी युद्ध का असर: मोरबी में गैस सप्लाई ठप, गंगापुर का खनिज उद्योग पूरी तरह बंद के कगार पर

अमरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की आंच अब सीधे राजस्थान के गंगापुर (भीलवाड़ा) तक पहुंच गई है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के चलते हारमुज जलडमरूमध्य से होने वाली गैस सप्लाई बाधित हो गई है। इससे गुजरात के मोरबी स्थित विश्व प्रसिद्ध सिरेमिक (टाइल्स) उद्योग की कमर तोड़ दी है। मोरबी के कारखाने बंद होने का सीधा और विनाशकारी असर गंगापुर के खनिज उद्योग पर पड़ा है। यहां कच्चे माल की सप्लाई रुकने से सैकड़ों औद्योगिक इकाइयां और खदानें लगभग पूरी तरह से ठप हो गई हैं। इससे हजारों लोगों के सामने बेरोजगारी का गहरा संकट खड़ा हो गया है।

मोरबी से सीधे जुड़ा है गंगापुर का अर्थतंत्र

गंगापुर खनिज उद्योग संघ के सदस्य दीपक चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में क्वार्ट्ज और फेल्सपार की सैकड़ों औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। इन खदानों और फैक्ट्रियों से खनिजों को कच्चे माल (पाउडर) के रूप में तैयार कर सीधे गुजरात के मोरबी भेजा जाता है। मोरबी में इसी माल से टाइल्स बनती हैं जो देश-विदेश के बाजारों में जाती हैं। चौधरी के अनुसार युद्ध के कारण खाड़ी देशों से मोरबी पहुंचने वाली गैस की सप्लाई रुक गई है। बिना गैस के सिरेमिक उद्योग का चलना नामुमकिन है। मोरबी में उत्पादन गिरने से गंगापुर से कच्चे माल की मांग शून्य हो गई है।

परिवहन कारोबार भी हुआ धड़ाम

खनिज इकाइयों में उत्पादन रुकने और सन्नाटा पसरने के साथ ही ट्रांसपोर्ट व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ट्रांसपोर्टर कानाराम ने बताया कि मोरबी के कारखाने बंद होने से माल का लदान पूरी तरह रुक गया है। मांग नहीं होने के कारण गाड़ियों के पहिए थम गए हैं और सैकड़ों ट्रक बिना काम के खड़े हैं। इससे वाहन मालिकों से लेकर ड्राइवरों तक पर आर्थिक मार पड़ रही है।

संकट एक नजर में

  • युद्ध के चलते खाड़ी देशों (हारमुज मार्ग) से गैस आपूर्ति बाधित होना।
  • मोरबी (गुजरात) का विशाल टाइल्स उद्योग बिना गैस के ठप।
  • कच्चे माल की मांग गिरी, सैकड़ों खदानें और पाउडर इकाइयां रातों-रात बंद।
  • हजारों मजदूर, ऑपरेटर और ट्रक ड्राइवर अचानक बेरोजगार; परिवहन व्यवसाय पर ब्रेक।