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राजस्थान पत्रिका की-नोट माय सिटी में इतिहासविद् प्रो. पुष्पेश पंत ने कहा- चित्तौड़ पूरे देश का गौरव, रानी पद्मिनी प्रेरणा स्रोत

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Historian Prof. Pushpesh Pant in chittorgarh

Historian Prof. Pushpesh Pant in chittorgarh

चित्तौडग़ढ़।

देश के ख्यातनाम इतिहासकार प्रो. पुष्पेश पंत ने कहा कि चित्तौड़ का इतिहास कौन नहीं जानता है। चित्तौड़ राजस्थान नहीं, वरन पूरे देश का गौरव है। महारानी पद्मिनी सभी देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।


प्रो. पंत ने मंगलवार सुबह उदयपुर रोड स्थित नीरजा मोदी स्कूल सभागार में 'राजस्थान पत्रिका की-नोट माय सिटी' कार्यक्रम में शहरवासियों को इतिहास के कई अनछुए तथ्यों से अवगत कराया। बतौर मुख्य वक्ता प्रो. पंत ने कहा कि जब वे छात्र थे तो इतिहास विषय को चुना। उस समय इतिहास में चंद छात्र ही हुआ करते थे। दूसरे छात्र इतिहास को गड़े मुर्दों को उखाडऩे वाला विषय मानते थे। उन्होंने कहा, इतिहास हमारी पहचान का अभिन्न अंग है। हम सब इतिहास की संतानें हैं।

सभागार में दो घंटे चले कार्यक्रम में श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। उद्बोधन के बाद सवाल-जवाब का सत्र हुआ तो लोगों में सवाल पूछने की होड़ लग गई। लोगों ने चित्तौड़ के इतिहास से लेकर उत्पन्न भ्रांतियों पर भी सवाल किए। कॉलेज व स्कूल विद्यार्थियों के साथ युवाओं व वरिष्ट नागरिकों ने भी प्रो. पंत से सवाल किए। लोगों ने प्रामाणिक इतिहास की पुस्तकें नहीं मिलने से लेकर इतिहास का सच कैसे जाने पर भी सवाल पूछे।

कैसे यकीन करें कौनसा मत सही

कई श्रोताओं ने इतिहास में एक ही विषय पर अलग-अलग मत होने से प्रामाणिकता को लेकर संशय जताया। इस पर प्रो. पंत ने कहा कि हम अपनी रुचि व मान्यता के हिसाब से पढ़ते हैं। जो बातें अपने हिसाब से खरी नहीं उतर पाती हैं, वे गलत लगने लगती हैं। इतिहास विज्ञान नहीं है। यहां कभी एकराय नहीं हो सकती। प्रारम्भ में प्रो. पंत का जिला कलक्टर इन्द्रजीत सिंह, नगर विकास न्यास अध्यक्ष सुरेश झंवर व नीरजा मोदी स्कूल के संचालक ओमप्रकाश अग्रवाल व पत्रिका की टीम ने स्वागत किया। कार्यक्रम का सह आयोजक नीरजा मोदी स्कूल था।

तोड़ मरोड़कर पेश नहीं करे इतिहास

प्रो. पंत ने कहा कि आजादी के लिए महाराणा प्रताप के संघर्ष को कौन नहीं जानता है। प्रताप राजस्थान ही नहीं, पूरे देश के लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने आजादी की लड़ाई लडऩे की प्रेरणा दी। इतिहास को अपने हिसाब से परोसेंगे तो जनता कहां स्वीकार करेगी। उन्होंने कहा, आप इतिहास में सच बोल रहे हो, तो पिटने की नौबत नहीं आती है। संजय लीला भंसाली तोड़-मरोड़ कर इतिहास परोस रहे थे तो जनविरोध झेला। देश की जनता जानती है कि महारानी पद्मिनी पूरे देश की आस्था व श्रद्धा का प्रतीक हैं।