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जानिए, भीलवाड़ा-शाहपुरा के पर्यटन स्थलों को

Tourist places of Bhilwara-Shahpura प्रदेश के वाणिज्यिक केन्द्र के रूप में विकसित भीलवाड़ा व शाहपुरा जिले की पहचान पर्यटन हब के रूप में भी होने लगी है। यहां प्राकृतिक, पुरातात्विक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व की सम्पदा चहुंओर बिखरी है। यहां फड़ चित्रकला और भवई व गेर नृत्य, मांडल का प्रसिद्ध नाहर नृत्य व बहरूपिया कला भी यहां की पहचान है।

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जानिए, भीलवाड़ा-शाहपुरा के पर्यटन स्थलों को

जानिए, भीलवाड़ा-शाहपुरा के पर्यटन स्थलों को

प्रदेश के वाणिज्यिक केन्द्र के रूप में विकसित भीलवाड़ा व शाहपुरा जिले की पहचान पर्यटन हब के रूप में भी होने लगी है। यहां प्राकृतिक, पुरातात्विक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व की सम्पदा चहुंओर बिखरी है। यहां फड़ चित्रकला और भवई व गेर नृत्य, मांडल का प्रसिद्ध नाहर नृत्य व बहरूपिया कला भी यहां की पहचान है।

नदियों की कलकल
प्रकृति अरावली पर्वतमाला से घिरे जिले में बनास, बेड़च, खारी, मेनाली व कोठारी नदी की कलकल भी रोमांच पैदा करती है। जिले का खनिज कारोबार व प्राचीन दुर्गों ने भी पर्यटन की नई राह खोली है।
भीलवाड़ा शहर में स्मृति वन, शिवाजी गार्डन, नेहरू गार्डन, गांधीसागर, मानसरोवर झील बच्चों से लेकर बड़ों के पसंदीदा स्थल हैं। देवरिया बालाजी मंदिर, हरणी महादेव मंदिर आस्था के गढ़ व पर्यटन केन्द्र हैं।

पातोला महादेव
समीपवर्ती उपनगर पुर झील-जलाशयों व पर्वतों से घिरा छोटा लेकिन खूबसूरत स्थान है। यहां धार्मिक, प्राकृतिक एवं पर्यटन महत्व के स्थलों में देवडूंगरी, पातोला महादेव, अधरशिला, क्यारा का हनुमानजी, नीलकंठ महादेव , घाटाराणी, नृसिंह द्वारा, लाडूड्या डूंगर व राज सरोवर शुमार हैं। इसी प्रकार उपनगर सांगानेर में प्राचीन गढ़, कबीर द्वारा तथा सिंदरी के बालाजी नामक सुरम्य स्थल हैं जहां हनुमान मंदिर व बगीचा है। तात्या टोपे स्मारक इतिहास का साक्षी है।
सवाईभोज मंदिर
आसींद में सवाईभोज मंदिर गुर्जर समाज का प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल है। मालासेरी देवडूंगरी भी आस्था का केन्द्र है। पहाडिय़ों से जुड़े परकोटे से घिरा बदनौर दुर्ग भी ऐतिहासिक है। शक्तिपीठ धनोप माता मंदिर, मांडल में ऐतिहासिक मिंदारे, बत्तीस खंभों वाली जगन्नाथ कछवाहा की छतरी प्रसिद्ध है।
जहाजनुमा मंदिर स्वस्तिधाम
शाहपुरा में रामनिवास धाम व क्रांतिकारी बारहठ परिवार का स्मारक भी पर्यटकों को खींच रहा है। ऐतिहासिक बनेड़ा दुर्ग, बनेड़ा राजभवन, बनेड़ा तालाब भी खास है। बनेड़ा दुर्ग तो विदेशी सैलानियों की खास पसंद है। जहाजपुर के जहाजनुमा मंदिर स्वस्तिधाम को रंग बिरंगी रोशनी में देखने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु आते है। घाटारानी भी शक्तिपीठ है, हालांकि जहाजपुर का दुर्ग खण्डहर में बदल रहा हैं।
मंदाकिनी मंदिर शिल्प का बेजोड़ प्रतीक
बिजौलियां क्षेत्र में मंदाकिनी मंदिर शिल्प का बेजोड़ प्रतीक है। महाकालेश्वर मंदिर, हजारेश्वर महादेव व उंडेश्वर मंदिर भी स्थापत्य कला एवं मूर्तिशिल्प की दृष्टि से आकर्षक है। पहाड़ों के बीच शक्तिपीठ जोगणियां माता मंदिर है। निकट ही मेनाल झरना भी है।

त्रिवेणी संगम छोटा पुष्कर
प्राचीन मांडलगढ़ दुर्ग अब जर्जर हो चुका हैं, लेकिन गौरवशाली अतीत की यादें इसके आगोश में सिमटी हैं। बीगोद के पास त्रिवेणी संगम छोटा पुष्कर के रूप में जाना जाता है। सिंगोली श्याम का मंदिर मेवाड़ का प्रमुख तीर्थ स्थल है।

गंगा बाईसा महारानी की छतरी

हमीरगढ़ का ईको टूरिज्म पार्क प्रदेश की पहचान बनने लगा है। गंगापुर में गंगा बाईसा महारानी की छतरी व नीलकंठ महादेव का मंदिर दर्शनीय हैं। इनके अलावा मेजा बांध, कोटड़ी चारभुजा मंदिर, जैन तीर्थ चंवलेश्वर, गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, धोड़ का प्राचीन मंदिर, धानेश्वरम् तीर्थ, बंक्याराणी, गुलाबपुरा, लादूवास, बागोर, जगदीश उमरी एवं रायपुर भी दर्शनीय हैं।

पर्यटकों का पसंदीदा केन्द्र

सूचना एवं जन संपर्क विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक श्यामसुन्दर जोशी का कहना है कि भीलवाड़ा व शाहपुरा जिला प्रकृति की गोद में रचा-बसा हुआ है। यहां अनेक पर्यटन स्थल और ऐतिहासिक धरोहर हैं। यदि यहां आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो जिले पर्यटन नक्शे पर उभरकर पर्यटकों का पसंदीदा केन्द्र बन सकते हैं।