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गंगोत्री के समीप भूस्खलन: बसों में ही बसेरा, भोजन, पानी, दवाई की बढ़ने लगी चिंता

परिजनों ने पूछी कुशलक्षेम, गंगोत्री के समीप भूस्खलन के बाद फंसे यात्रियों ने बयां की पीड़ा

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भीलवाड़ा

गंगोत्री के समीप भू स्खलन के बाद मार्ग बाधित होने से फंसे 27 घंटे हो गए। अभी तक पर्याप्त भोजन के प्रबंध नहीं हुए है। पुलिस व अन्य कार्मिकों को भी अपनी वेदना बता दी हैं, व्यवस्था हो तो थोड़ी राहत मिले। कुछ ऐसी ही पीड़ा गंगोत्री के समीप भूस्खलन के बाद फंसे भीलवाड़ा के तीर्थयात्रियों की हैं। यात्रियों का कहना है कि 50 से अधिक सीटर की तीन बसों के अलावा भी कई यात्री यात्रा पर निकले है। इस मार्ग पर सभी अलग-अलग जगह पर अटके हुए है। मार्ग पर छोटे-छोटे रेस्टोरेंट हैं, जहां पर कुछेक को तो ठहरने की जगह मिल गई, लेकिन अब भी कई लोग ठिकाना तलाश रहे है। इंतजामात नहीं होने से वाहनों में ही बैठे हुए हैं।

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रात में दाल-चावल की व्यवस्था

राजेंद्र गंदोडि़या ने बताया कि यात्रा के लिए 17 सितंबर को निकले थे। हम बीस यात्रियों को फंसे हुए 28 घंटे से अधिक समय हो गया। सभी बस में ही बैठे हुए है। कुछ यात्रियों को मेडिकल सुविधा की भी जरूरत है, लेकिन यहां उपलब्ध ही नहीं है। खाने का सामान भी समाप्त हो चुका है। रात में दाल-चावल ही खाने को नसीब हुए। आगे की यात्रा के लिए फ्लाइट की टिकट बुक कराई है, ऐसे में परेशानी भी बढ़ रही हैं। जल्द मार्ग सुचारू हो ताकि सभी को राहत मिले।

एक कमरे में 6 से अधिक लोग

भीलवाड़ा की सुनिता देवी बताती है कि पानी, भोजन जैसी मूलभूत सुविधाएं ही नहीं है। प्रशासन स्तर से भी मदद नहीं मिलने से परेशानी बढ़ रही है।अशोक अग्रवाल के मुताबिक छोटे रेस्टोरेंट में एक कमरे में 6 से अधिक लोग ठहरे हुए है। रात आठ बजे तक भोजन सहित अन्य प्रबंध नहीं हुए थे। रेस्टोरेंटों में भी जो स्टॉक था, वो समाप्त हो गया है। इधर, तीर्थयात्रियों के फंसे होने की जानकारी मिलने पर परिजनों ने भी फोनकर कुशलक्षेम पूछी। यात्रियों ने परेशानी बयां करने के साथ ही स्वयं के सुरक्षित होने की जानकारी दी, जिस पर परिजनों ने राहत की सांस ली।