
Life echoes in the cradle of MGM, newborn baby girl found
केन्द्र व राज्य सरकारों का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ-बेटी खिलाओ का यह नारा राजस्थान के भीलवाड़ा में पूरी तरह निर्मूल साबित हो रहा है। पिछले करीब डेढ़ महिने में तीन नवजात बालिकाएं महात्मा गांधी चिकित्सालय की मातृ एवं शिशु इकाई के पालने में मिल चुकी हैं।
मंगलवार रात 10:30 बजे सन्नाटा अचानक अलार्म की आवाज से टूट गया। ‘पालनागृह’ में जैसे ही किसी अज्ञात व्यक्ति ने एक नवजात कन्या को रखा, सिस्टम सक्रिय हो उठा। अलार्म की गूंज ने संकेत दिया कि एक मासूम जिंदगी मदद की पुकार कर रही है। एनआइसीयू स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचा। नन्हीं बच्ची को स्नेह भरे हाथों से उठाकर वार्ड में भर्ती किया गया। उस पल अस्पताल का हर कर्मचारी केवल एक ही भावना से भरा था कि इस नन्हीं जान को सुरक्षित रखना है।
फेफड़े अविकसित वजन 2600 ग्रामबालिका का उपचार कर रहे डॉ. कुलदीप सिंह राजपूत ने बताया कि बच्ची का वजन 2600 ग्राम है, लेकिन उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हैं। सांस लेते समय फेफड़े पूरी तरह फैल नहीं पा रहे, जिसके लिए दवाइयां दी गई हैं। एक्स-रे सहित सभी जरूरी जांचें कराई गई हैं।वेदिका’ नाम से मिली पहचाननवजात के मिलने की सूचना पर बाल कल्याण समिति के सदस्य विनोद राव अस्पताल पहुंचे और बच्ची के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
समिति अध्यक्ष चंद्रकला ओझा ने इस नन्हीं परी को काल्पनिक नाम ‘वेदिका’ दिया। अब वह सिर्फ एक परित्यक्त बच्ची नहीं, बल्कि ‘वेदिका’ है और एक पहचान, एक उम्मीद, एक नई शुरुआत है।सुरक्षा के सख्त इंतजामबाल कल्याण समिति ने पुलिस अधीक्षक और अस्पताल प्रशासन को लिखित पत्र सौंपकर 24 घंटे महिला कर्मचारी और महिला होमगार्ड की तैनाती के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य साफ है कि मासूम की सुरक्षा और उपचार में कोई कमी न रहे।
Updated on:
05 Mar 2026 10:40 am
Published on:
05 Mar 2026 09:35 am
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