
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजस्थान सहित चार राज्यों में पेटकोक और फर्नेस ऑयल पर रोक लगाए जाने से भीलवाड़ा के उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है
भीलवाड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजस्थान सहित चार राज्यों में पेटकोक और फर्नेस ऑयल पर रोक लगाए जाने से भीलवाड़ा के उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कपड़ा फैक्ट्रियों को चालाने में ईंधन के रूप में काम आने वाले पेटकोक की रोक तथा इण्डोनेशिया से कोल मंगवाने पर उद्योगों को लगभग पौने छह करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार वहन करना पड़ा है।
उधर जोधपुर की एक कम्पनी ने पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी उस अधिसूचना को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय में वाद दायर किया है, जिसमें लाइम स्टोन व सीमेन्ट उद्योग को पेटकोक ईंधन के रूप में काम में लेने की छूट दे रखी है। इस मामले में न्यायालय की खण्डपीठ ने केन्द्र सरकार से जवाब तलब किया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश में पेटकोक और फर्नेस ऑयल के उपयोग पर रोक लगा दी थी। केन्द्र सरकार ने 19 जनवरी को यह अधिसूचना जारी करते हुए पेटकोक के उपयोग एवं विक्रय के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। जिसमें पेटकोक के आयात पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन साथ ही सीमेंट और लाइमस्टोन औद्योगिक इकाइयों को आयात करने की छूट दी गई। याचिकाकर्ता ने इस छूट को गलत बताते हुए याचिका दायर की थी। इस पर न्यायालय ने प्रारम्भिक सुनवाई के बाद खण्डपीठ ने केन्द्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय, वाणिज्यिक मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल को नोटिस जारी किया।
एक प्रोसेस हाउस पर 30 लाख का भार
पेटकोक पर रोक लगाने के बाद से वस्त्रनगरी में पेटकोक आना बन्द हो गया है। अब प्रोसेस हाउस संचालन आयातित कोल से आपना काम चला रहे है। इस कोल से प्रति प्रोसेस हाउस संचालकों को लगभग एक लाख रुपए प्रतिदिन तथा एक माह में 30 लाख रुपए का अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा है। शहर में 19 प्रोसेस हाउस चल रहे हैं। यह कोल इण्डोनेशिया से आ रहा है। जो पेटकोक से काफी महंगा है। भीलवाड़ा में 19 प्रोसेस हाउस व पावर प्लांट संचालित है।
कोयले से सस्ता पेटकोट
ऑयल रिफाइनरी का बायप्रोडक्ट पेटकोक है। इसे उद्योगों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। यह कोयले की तुलना में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक सस्ता भी होता है। देश में अधिकांश पेटकोक की आपूर्ति अमरीका से होती है। कोल व्यापारी अशोक बाहेती ने बताया कि प्रोसेस हाउसों में एक माह में जहां 800 टन पेटकोक की जरूरत थी। लेकिन अब कोल 1500 टन आ रहा है। ऐसे में हर प्रोसेस हाउस में एक दिन का कोल खर्च लगभग 70 हजार से एक लाख रुपए तक पहुंच गया है। ऐसे में उद्योग चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
Published on:
28 Apr 2018 01:50 pm

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