
महा-संयोग: 26 मार्च को एक ही दिन 4 महापर्व, अष्टमी व रामनवमी एक ही दिन
चैत्र नवरात्र अपने अंतिम चरण में हैं और इस बार देवी आराधना के ये पावन दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास बन गए हैं। पंचांग और ग्रहों की स्थिति के अनुसार 26 मार्च को एक अद्भुत संयोग बन रहा है। इस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि लगने के कारण एक ही दिन दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा, अन्नपूर्णा अष्टमी और राम जन्मोत्सव (राम नवमी) का प्रभाव देखने को मिलेगा।
शास्त्रों में उदय तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इसी आधार पर 26 मार्च को महाष्टमी (दुर्गा अष्टमी) और 27 मार्च शुक्रवार को महानवमी का पर्व मनाया जाएगा। राम जन्मोत्सव 26 मार्च को ही मनाया जाएगा। क्योंकि राम का जन्म दोपहर 12.15 बजे हुआ था।
26 मार्च को सुबह 11:24 से दोपहर 12:12 बजे तक 'संधि पूजा' का विशेष समय रहेगा। शास्त्रों के अनुसार यह वही 48 मिनट का अत्यंत शुभ काल है, जब देवी चामुंडा ने चंड-मुंड का संहार किया था। मान्यता है कि इस समय की गई विशेष आराधना जीवन की बाधाओं को दूर कर शत्रुओं पर विजय दिलाती है।
अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1:50 बजे से ही लग जाएगी, लेकिन उदय तिथि के अनुसार महाष्टमी का पर्व 26 मार्च को ही मनाया जाएगा। 26 मार्च को सुबह 11:49 तक अष्टमी रहेगी, इसलिए कन्या पूजन सुबह के समय करना सबसे श्रेष्ठ रहेगा।
नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:49 बजे से शुरू होकर 27 मार्च की सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के चलते महानवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। इसी दिन कन्या पूजन करना शास्त्रसम्मत होगा। श्रद्धालु 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे नवमी तिथि समाप्त होने के बाद ही व्रत का पारण कर अन्न ग्रहण करें।
पंडित अशोक व्यास ने बताया कि 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को साक्षात मां भगवती का स्वरूप मानकर आमंत्रित करें। उनके चरण धोकर कुमकुम का तिलक लगाएं। आदरपूर्वक हलवा, पूरी व चने का भोग खिलाएं। सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। नवरात्र का समापन दशमी तिथि को कलश विसर्जन के साथ करना अत्यंत शुभ होता है। विसर्जन से पूर्व माँ दुर्गा से 9 दिनों की पूजा में अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना अवश्य करें। कलश के पवित्र जल को पूरे घर में छिड़कें, इससे घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति का वास होता है।
Published on:
25 Mar 2026 09:09 am
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