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बड़ी राहत की उम्मीद: प्रदेश के 1.16 लाख ‘मिड-डे-मील’ रसोइयों के मानदेय में होगी वृद्धि

- आयुक्त शर्मा ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र - आर्थिक रूप से कमजोर 'कु़क कम हेल्पर्स' के अच्छे दिन आने के संकेत

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Major relief expected: Honorarium of 1.16 lakh mid-day meal cooks in the state to be increased

Major relief expected: Honorarium of 1.16 lakh mid-day meal cooks in the state to be increased

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए भोजन पकाने वाले 1.16 लाख कुक-कम-हेल्पर्स के लिए खुशखबरी है। मिड-डे-मील (पीएम पोषण) योजना के तहत कार्यरत इन रसोइयों के अल्प मानदेय में वृद्धि के लिए राज्य सरकार ने कवायद तेज कर दी है। मिड-डे-मील कार्यक्रम के आयुक्त विश्व मोहन शर्मा ने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय को 'मोस्ट अर्जेंट' पत्र लिखकर मानदेय में समुचित बढ़ोतरी करने का आग्रह किया है।

यह है प्रदेश की स्थिति

वर्तमान में कु़क कम हेल्पर्स को मात्र 2297 रुपए प्रति माह का मानदेय मिल रहा है। पत्र के अनुसार राज्य में वर्तमान में बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। 1 अप्रेल 2025 से लागू व्यवस्था के तहत केंद्र का हिस्सा 600 रुपए, राज्य का हिस्सा 1697 रुपए। कुल मानदेय 2297 रुपए प्रति माह दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत केंद्र व राज्य का अनुपात 60:40 निर्धारित है। इसके बावजूद राज्य सरकार अपने कोटे से 1297 के अतिरिक्त 400 रुपए दे रही है। कुल 1697 रुपए का भुगतान कर रही है।

क्यों पड़ी मानदेय बढ़ाने की जरूरत

आयुक्त विश्व मोहन शर्मा की ओर से भेजे गए पत्र में मानदेय वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए गए हैं। पहला कुक कम हेल्पर्स की ओर से विभिन्न स्तरों पर लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही है। दूसरा यह वर्ग आर्थिक रूप से बेहद कमजोर तबके से आता है। ऐसे में मौजूदा महंगाई के दौर में 2297 रुपए में गुजारा करना मुश्किल हो रहा है।

स्कूलों में निभा रहे हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

प्रदेश के स्कूलों में पीएम पोषण योजना के सफल क्रियान्वयन का पूरा जिम्मा इन्हीं 1.16 लाख हेल्पर्स पर है। इनका कार्य केवल खाना पकाना ही नहीं, बल्कि भोजन परोसना और रसोईघर व बर्तनों की साफ-सफाई करना भी शामिल है।