
Mining scandal: 'Illegal' damage to revenue worth Rs 14 crore, protectors become destroyers!
अनिल सिंह चौहान
प्रदेश के बिजौलिया खनन क्षेत्र में सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाने का एक बड़ा मामला गरमाया हुआ है। मुख्य सचिव को भेजी गई एक गंभीर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 'नयानगर सी एक्सटेंशन' के जिन ब्लॉक्स से सरकार को 14 करोड़ रुपए की आय होनी थी, उन्हें विभाग के ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मिलीभगत कर अवैध खनन की भेंट चढ़ा दिया।
इस पूरे प्रकरण में विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर सरकार ने राजस्व हानि के मामले में तत्कालीन अधीक्षण खनिज अभियंता को सेवा से पदच्युत कर दिया, वहीं दूसरी ओर 14 करोड़ की राजस्व हानि पहुंचाने के आरोपी तत्कालीन एएमई पुष्पेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पदोन्नति (प्रमोशन) का इनाम दे दिया गया।
खनिज विभाग बिजौलिया ने नवंबर 2017 में नयानगर के आराजी संख्या 124 में 5 ब्लॉक्स की ऑनलाइन नीलामी की थी, जिसकी बोली 14 करोड़ रुपए तक पहुंची थी। आरोप है कि सफल बोलीदाताओं को कब्जा सौंपने से पहले ही तत्कालीन सहायक खनिज अभियंता पुष्पेंद्र सिंह की मिलीभगत से यहां बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ। इससे ब्लॉक नंबर 1 का अधिकांश हिस्सा पूरी तरह खाली हो गया और सरकार को मिलने वाला राजस्व स्वाहा हो गया।
जिला कलक्टर भीलवाड़ा के आदेश पर 20 मार्च 2021 को मौका निरीक्षण किया गया, जिसमें अवैध खनन की पुष्टि हुई और सर्वेयर कौशल शर्मा ने पंचनामा तैयार किया। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस पंचनामे को 12 दिनों तक दबा कर रखा गया। इसके बाद 1 अप्रेल 2021 की रात को आनन-फानन में बिजौलिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। सवाल उठ रहा है कि आखिर 12 दिनों तक किसके दबाव में कार्रवाई रोकी गई और क्या इस दौरान साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई?
प्रकरण में कानूनी प्रक्रिया को भी दरकिनार करने के आरोप हैं। राजस्थान प्रधान खनिज रियायती नियमावली 2017 के अनुसार, किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित क्वारी लाइसेंसधारियों को नोटिस देना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में बिना किसी सुनवाई या नोटिस के सीधे थाने में मामला दर्ज करवा दिया गया।
प्रकरण में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब यह सामने आया कि नयानगर सी के ब्लॉक नंबर 101 और 103 का मामला उच्च न्यायालय में लंबित होने के बावजूद तत्कालीन खनि अभियंता ने इन्हें दूसरे व्यक्तियों के नाम पर ट्रांसफर कर दिया। कोर्ट में वाद लंबित रहते हुए यह खेल कैसे हुआ, अब इसकी उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराने की मांग की जा रही है।
इस मामले में शिकायत मिली थी उसकी विभागीय स्तर पर जांच कर रिपोर्ट डीएमजी को भेज दी गई है।
ओपी काबरा, अधीक्षण खनिज अभियंता भीलवाड़ा
Published on:
16 Jan 2026 11:27 am
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