
टेक्सटाइल उद्योग के लिए आईटीसी-4 रिटर्न भरने की कठिनाइयों को देखते एवं औद्योगिक संगठनों से मिले प्रतिवेदनों के आधार पर 18 अप्रेल को नए प्रावधान किए है
भीलवाड़ा ।
टेक्सटाइल उद्योग के लिए आईटीसी-4 रिटर्न भरने की कठिनाइयों को देखते एवं औद्योगिक संगठनों से मिले प्रतिवेदनों के आधार पर 18 अप्रेल को नए प्रावधान किए है। इसमें एक वर्ष तक इनवर्ड चालान को कई ऑउटवर्ड चालान से लिंक करने एवं माल की मात्रा को मीटर एवं किलोग्राम में आपस में लिंक करने के प्रावधान है।
यह बात वित्त सचिव (राजस्व) प्रवीण गुप्ता ने बुधवार शाम मेवाड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री में जीएसटी कार्यशाला में कही। उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल क्षेत्र में पहले टेक्स नहीं था लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद टेक्सटाइल उद्यमियों ने सहयोग दिया। टेक्सटाइल उद्योग में आइटीसी जमा रहने की समस्या है उसका समाधान के प्रयास किए जा रहे है।
निर्यात माल पर रिफंड के संबंध में कहा कि पिछले जुलाई से मार्च तक मेन्यूअल रिफण्ड होने से इसमें विलम्ब हुआ। अब स्थिति में सुधार हुआ है अभी तकनीकी कमियों से काफी रिफण्ड लम्बित है। विभाग ने इस संबंध में उद्यमियों को इमेल से जानकारी दी है। उन्होंने निर्यातकों से तकनीकी कमियों को दूर करने का आग्रह किया, ताकि शेष रिफण्ड शीघ्र जारी किए जा सके।
वाणिज्यकर आयुक्त आलोक गुप्ता ने कहा कि देश में जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद राजस्थान ही एकमात्र राज्य था जिसने टेक्सटाइल उद्योग की व्यवहारिक समस्याओं को जीएसटी काउंसिल के सामने रखकर समाधान करवाने में सफल रहा। उन्होंने मेवाड चेम्बर की सकारात्मक भूमिका की सराहना की। वित्त विभाग में विशेषाधिकारी मीनल भौंसले ने शंकाओं का समाधान किया। चेम्बर अध्यक्ष दिनेश नौलखा, महासचिव आरके जैन, पूर्वाध्यक्ष एसएन मोदानी, वीके सोडानी, पूर्व महासचिव एसपी नाथानी ने अतिथियों का स्वागत किया। जैन ने जीएसटी प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। नगर परिषद सभागार में वाणिज्यिक कर विभाग की कार्यशाला में सांसद सुभाष बहेडिय़ा ने कहा कि आईटीसी रिटर्न भरने तथा जॉब पर कपड़ा बनाने वालों के सामने कई परेशानी आ रही है। कपड़ा बनाने के लिए यार्न किलोग्राम में भेजा जाता है जबकि कपड़ा मीटर में आता है। बहेडिय़ा ने आरसीएम का मुद्दा भी उठाया।
व्यापारी हीरालाल ने सवाल किया कि रिटर्न एक दिन देरी से फाइल करने पर पेनल्टी का प्रावधान है। सरकार जो हमसे माल खरीदती है, उसका भुगतान एक-एक साल में पास नहीं होता है। क्या सरकार एमएसएमई उद्योगों को ब्याज देगी। हम सरकार से झगड़ा नहीं कर सकते है, लेकिन भुगतान ४५ दिन में हो जाए, ऐसी व्यवस्था की जाए। ताकि हम समय पर रिटर्न दाखिल कर सके। यह सवाल वित्त सचिव (राजस्व) प्रवीण गुप्ता से किया तो सभी व्यापारी व अधिकारी दंग रह गए। गुप्ता ने सवाल किया कि आप क्या चाहते है? हीरालाल ने कहा कि आप वित्त सचिव है। भुगतान की सीमा ४५ दिन तय है, भुगतान समय पर कराने के आदेश दिलावे।
सीए गोपाल मून्दड़ा ने सवाल किया कि रिटर्न कोई भी व्यापारी या दुकानदार नहीं भरता है। उनका रिटर्न सीए ही भरते है। लेकिन ऑन लाइन रिटर्न भरने पर ओटीपी नम्बर आते है। वह मोबाइल नम्बर किसी व्यापारी, व्यापारी की पत्नी, बेटी या बेटे के नाम पर होता है। इसकी जानकारी लेने पर ही समय निकल जाते है। ओटीपी का अधिकार एआर के दिलाया जाए ताकि समय रहते रिटर्न दाखिल किया जा सके। इस सवाल पर नगर परिषद सभागार तालियों की गूंज उठा।
संयुक्त आयुक्त गोकुलराम चौधरी ने सभी अतिथियों व व्यापारियों का स्वागत किया। सहायक आयुक्त मुख्यालय चन्दनसिंह शेखावत ने पीपीटी के माध्यम से जीएसटी की जानकारी दी। सहायक आयुक्त दिनेश चन्द राकेचा ने नए प्रावधानों की जानकारी दी। इस दौरान विभाग के अधिकारियों के अलावा चित्तौडग़ढ़, प्रतापगढ़, राजसमन्द तथा भीलवाड़ा के व्यापारी, सीए सहित अन्य उपस्थित थे।
Published on:
26 Apr 2018 02:11 pm

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